कैथल जिले में अभी 20 हजार बैग की और जरूरत है। शहर के सरकारी खाद केंद्रों में शुक्रवार को ही 10 हजार बैग पहुंचे थे। बता दें कि जिले में गेहूं सीजन में चार लाख 80 हजार कट्टों की पड़ती जरूरत है। अभी कलायत और राजौंद क्षेत्र में गेहूं की बिजाई जारी है। अब तक चार लाख 50 हजार के करीब बैग वितरित किए जा चुके हैं। बता दें शुक्रवार को ही 10 हजार बैग पहुंचे थे। इन्हें तुरंत ही ग्रामीण क्षेत्रों की पैक्स में पहुंचाया गया था।
गौरतलब है कि काफी समय से खाद नहीं मिलने के कारण दुकानों पर चक्कर काट कर थक चुके थे। रोजाना कृषि विभाग के कार्यालयों में भी खाद को लेकर संपर्क किया जा रहा था। गौरतलब है कि जिले में एक लाख 65 हजार हेक्टेयर में गेहूं की अगेती व पिछेती बिजाई होनी है। दिसंबर के महीने तक किसानों की ओर से खेतों में बिजाई की जाती है।
धान कटाई के बाद अब जिले में गेहूं बिजाई का 80 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। बारिक धान में 1121, मुच्छल व बासमती धान की कटाई का कार्य चला हुआ है। 20 प्रतिशत बिजाई का जो कार्य बचा हुआ है वह भी जल्द पूरा हो जाएगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष डीएपी खाद की जगह किसानों ने एनपीके खाद का भी प्रयोग किया है।
जिससे गेहूं, सरसों भी अच्छी निकलेगी। फसल की चमक में भी इजाफा होगा। यह फसल की गुणवत्ता में भी बढ़ोतरी करता है। वहीं गेहूं की फसल में दाने का साइज व उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए एनपीके का इस्तेमाल कर सकते हैं।
कृषि विभाग के एसडीओ सतीश नारा ने बताया कि जिले में एक दिन पहले ही 10 हजार बैग पहुंचे थे। किसानों को खाद की कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी। जिले में चार लाख 80 हजार डीएपी खाद के बैग की आवश्यकता पड़ती है। चार लाख 50 हजार 984 कट्टों को बांटा जा चुका है।