भिवानी। दशहरा यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं। मगर समाज में नशा एक ऐसी सामाजिक बुराई बन चुकी है। जिस पर जीत पाना बहुत जरूरी हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भिवानी के 60 गांवों ने। इन गांवों ने जागृति की कमान से नशे पर निशाना साधा, ग्राम पंचायतों के रामबाण से नशाखोरी पर जीत भी मिली। ये वो गांव हैं, जिनमें एक साल के दौरान नशाखोरी या नशे के पदार्थों की बिक्री का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। अधिकतर गांवों में तो ग्रामीणों ने शराब ठेका खोले जाने का भी विरोध किया, जिसमें महिलाओं की अहम भूमिका रही। यही वजह है कि इन गांवों के युवा आज नशे से काफी दूर हैं।
दशानंन यानी दस सिरों वाले रावण को दस बुराईयों का प्रतीक भी माना जाता है। इसी में एक बुराई नशा भी है। जिससे नाश की जड़ भी माना जाता है। भिवानी पुलिस प्रशासन ने नशे के खिलाफ जिले में पिछले काफी अर्से से स्पेशल मुहिम चलाई। इसका असर गांवों में भी अब दिखने लगा। पुलिस ने ग्रामीणों से युवा पीढ़ी को नशे की लत से दूर रखने और इस बुराई को जड़ से खत्म करने में पूरा सहयोग करने की अपील की। इसका असर यह हुआ कि आज जिले में 60 गांव ऐसे हैं, जिनमें एक साल के दौरान नशाखोरी या नशा बिक्री का कोई भी केस दर्ज नहीं हुआ।
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इन गांवों में खत्म हो रही नशे की बुराई
भिवानी सदर पुलिस थाना क्षेत्र के गांव मुंढाल कलां, मुंढाल खुर्द, तालु, धनाना, जताई, मंढाना, चांग, छोटी चांग, ढाणी हरसुख, रिवाड़ीखेड़ा, फूलपुरा, नौरंगाबाद, सिरसा घोघड़ा, तिगड़ाना, प्रेमनगर, राजपुरा खरकड़ी, दिनोद, हालुवास, गोविंदपुरा, नीमड़ीवाली, रूपगढ़, झरवाई, ढाणी जंगा, नंदगांव, गौरीपुर, मानहेरू, मधमाधवी, नांगल, पूर्णपूरा, उमरावत, धारेडू, कायला, बडाला, अजीतपुर, ढाणा लाडनपुर, ढाणा नरसान, मिताथल शामिल हैं। इसी तरह बवानीखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव जाटु लुहारी, पुर, सिवाड़ा, कुंगड, कुंगड भैणी, कुंगड खेडी, सिवाना, अलखपुरा, जीता खेडी, मिलकपुर, चौरटा बडसी, दुर्जन पुर, ढाणी खुशहाल, बलियाली, भुरटाना, किरावड, रतेरा, बोहल, पपोसा, अलखपुरा, बडेसरा, जमालपुर शामिल है। इन गांवों में 2021 से 2022 के दौरान अब तक कोई भी एनडीपीएस एक्ट का केस दर्ज नहीं है।
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इन गांवों में अभी भी जिंदा है नशे का रावण
जिले के गांव खरककलां, खरक खुर्द, कलिंगा, बामला, कितलाना, बापोड़ा, सांगा, सैय, गुजरानी, प्रहलादगढ़ में अभी भी नशे की बुराई का प्रतीक रावण जिंदा है। इन गांवों में एक साल के दौरान काफी नशाखोरी व एनडीपीएस के मामले सामने आ चुके हैं। इसी तरह शहर में भी कई मोहल्ला व इलाके ऐसे हैं, जहां नशे का सबसे अधिक कारोबार होता है। इनमें शहर का हालु मोहल्ला, दिनोद रोड जीतुवाला क्षेत्र शामिल हैं, जहां साल में औसतन काफी अधिक मामले सामने आते हैं।
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पूरे हरियाणा में चलाई स्टीलमैन ने नशे की मुहिम, अब जीके में भी पूछे जा रहे प्रश्न
भिवानी जिले के बिजेंद्र पहलवान ने 29 अगस्त 2020 में पूरे प्रदेश में बाइक से नशाखोरी के खिलाफ युवाओं में जागृति लाने के लिए मुहिम चलाई। उनकी ये मुहिम दादरी से शुरू होकर पंजाब के संगरूर तक पहुंची, जिसका समापन भिवानी में हुआ। पांच साल के दौरान बिजेंद पहलवान ने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 45 बार शक्ति प्रदर्शन भी किए। जिसकी बदौलत उन्हें स्टीलमैन का खिताब मिला। उनके कई प्रदर्शन अपना रिकार्ड भी दर्ज करा चुके हैं। अब बिजेंद्र के नशाखोरी मुक्ति अभियान से जुड़े प्रश्न भी जीके की किताबों में बच्चों से पूछे जा रहे हैं। नशाखोरी मुक्ति से जुड़ी मुहिम की बदौलत बिजेंद्र पर पांच पत्रिकाएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
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एडीजीपी के निर्देशानुसार गली, मोहल्ला, गांव व शहर और कस्बा स्तर पर पुलिस ने नशाखोरी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया हुआ है। इसके सकारात्मक नतीजे भी सामने आए हैं। हमारा प्रयास है कि युवाओं को नशे से दूर रखने में हर परिवार और समाज के हर तबके के लोग आगे आएं और इस बुराई को पूरे देश से खत्म करने में हर संभव सहयोग करें। नशा एक ऐसी बुराई हैं, जो न केवल घर, परिवार और आपसी रिश्तों को बर्बाद कर देती है, बल्कि समाज पर भी इसका गहरा असर पड़ता है। ज्यादातर अपराध भी नशे की वजह से ही होते हैं।
- अजीत सिंह शेखावत, पुलिस अधीक्षक भिवानी।