भिवानी। उपायुक्त महावीर कौशिक ने कहा कि देश की प्रगति युवाओं पर निर्भर है। हमें नशे की शुरुआती जड़ को ही समाप्त करना होगा। उपायुक्त मंगलवार को पंचायत भवन में नशा मुक्ति पर रिसोर्स पर्सन के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर में अपना संबोधन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि अक्सर स्कूल के दौरान ही विद्यार्थी नशे की शुरुआत करते हैं, जो मजाक मजाक में शुरू करते हैं, लेकिन यही मजाक उनकी आदत बन जाती है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल में प्रार्थना के दौरान नशे से दूर रहने के बारे में समझाया जा सकता है। बच्चे को नशे के दुष्परिणाम की जानकारी देना जरूरी है। यदि बच्चा आपकी बात नहीं मानता है तो उसके परिजनों को उसकी आदत के बारे में बताएं।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विशेषकर स्कूल, कॉलेज और पॉलिटेक्निक के मुख्य द्वार के पास पेंटिंग से हेल्प लाइन नंबर लिखे जाएंगे, जिसके माध्यम से नशा करने वाले या नशा बेचने वाले या फिर नशा छोड़ने के बारे में सूचित किया जा सकता है। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग गुरुग्राम से प्रशिक्षक के तौर पर आमंत्रित डॉ. आदित्य कौशिक ने कहा कि समय के साथ-साथ हमारी जीवन शैली में भी बदलाव होता जा रहा है। हमारी सोच ही हमारे व्यवहार में परिवर्तित हो जाती है। फिर उसका प्रभाव समाज में पड़ने लगता है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भी हम तीन श्रेणियां में मुख्य रूप से विभाजित करते हैं, जिसमें पहली से आठवीं कक्षा तक, 9 वीं से 12वीं और फिर उच्चतर क्लासों की शिक्षा तक शामिल होते हैं। हमें बच्चों में ऐसा विश्वास पैदा करना होगा कि बच्चा शिक्षक के पास आकर अपनी समस्या के बारे में बता सके।
कार्यशाला के दौरान चौ. बंसीलाल राजकीय सामान्य अस्पताल में कार्यरत मनोरोग चिकित्सक डॉ नंदनी लांबा ने भी नशे के लक्षण और दुष्प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दीं। इस दौरान विभिन्न स्कूलों से रिसोर्स पर्सन के रूप में शिक्षक मौजूद रहे। सीटीएम अनिल कुमार ने कहा कि शिक्षक वर्ग को रिसोर्स पर्सन के रूप में तैयार किया जा रहा है। रिसोर्स पर्सन को युवाओं को नशे से बचाने के लिए यह कार्य एक सामाजिक दायित्व समझकर करना होगा।