भिवानी। अधिकारियों की लापरवाही से छह बेसहारा बच्चे सरकार की स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ पाने से वंचित रह गए। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के निरीक्षण में सामने आया है कि छह माह से इस योजना के आवेदनों पर जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई ही नहीं की। फाइलों में दफन ये आवेदन उन बेसहारा बच्चों के लिए बड़ी उम्मीद थे, जिनके सिर से पिता का या माता-पिता दोनों का साया उठ चुका है। हरियाणा बाल राज्य आयोग के सदस्य के निरीक्षण में अधिकारियों की लापरवाही की पोल खुलने पर संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा गया है। वहीं उपायुक्त से भी इस मामले में कड़ा संज्ञान लेकर कार्रवाई के लिए अनुशंसा की गई है।
दरअसल, हरियाणा सरकार की तरफ से जिला बाल कल्याण समिति के माध्यम से अपने पिता या फिर माता-पिता दोनों को खो चुके गरीब बेसहारा नाबालिग बच्चों को हर माह चार हजार रुपये पेंशन दी जा रही है। ऐसे मामलों में बाल कल्याण समिति की तरफ से पात्र बच्चों की फाइल तैयार कर इसे जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) के पास भेजा जाता है। डीसीपीओ की अनुशंसा के साथ ही ये आवेदन उपायुक्त के समक्ष भेजे जाते हैं। जिन पर एक माह के अंदर ही फैसला लेना अनिवार्य है। लेकिन जिला बाल कल्याण समिति की तरफ से पात्र छह बच्चों के आवेदन पिछले छह माह से जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय की फाइलों में ही दफन होकर रह गए।
बुधवार को हरियाणा बाल राज्य आयोग के सदस्य अनिल कुमार लाठर ने कई कार्यालयों का निरीक्षण किया। इसके बाद जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय में भी पहुंचे। यहां पर पात्र बच्चों को सरकार से मिलने वाली सुविधा के बारे में जब जाना तो वे हैरान रह गए। छह पात्र बच्चों के पेंशन संबंधी आवेदनों पर पिछले छह माह से कोई संज्ञान ही नहीं लिया गया था। इसे गंभीरता से लेते हुए लाठर ने संबंधित विभाग को जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिख डाला। वहीं उपायुक्त से भी इस मामले में मिलकर कड़ा संज्ञान लेने की अनुशंसा की गई है। संवाद
यह है स्पॉन्सरशिप योजना
हरियाणा सरकार ने कोरोना काल के बाद से ही बेसहारा बच्चों के लिए स्पॉन्सरशिप योजना लागू की है। इसमें पिता या फिर माता-पिता को खोने वाले बेसहारा नाबालिग बच्चों को हर माह चार हजार रुपये प्रति बच्चा पेंशन दी जा रही है। शहरी दायरे में परिवार की सालाना आमदनी 90 हजार और ग्रामीण दायरे में 72 हजार से कम होना अनिवार्य है।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि छह माह से पात्र बच्चों के आवेदन संबंधित सक्षम अधिकारियों के पास नहीं भेजे गए। ये बड़ी लापरवाही है। इसकी वजह से पात्र बच्चों को समय रहते योजना के लाभ से जानबूझकर वंचित किया गया। इस मामले में मैंने संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा है वहीं उपायुक्त से भी मैंने व्यक्तिगत मुलाकात कर इसमें कड़ा संज्ञान लेकर कार्रवाई की अनुशंसा की है।
-एडवोकेट अनिल कुमार लाठर, सदस्य, हरियाणा बाल राज्य आयोग।
जिला बाल कल्याण समिति की ओर से नवंबर, दिसंबर और जनवरी में अब तक छह बेसहारा बच्चों के पेंशन केस जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय में भेजे जा चुके हैं। इन आवेदनों को जिला बाल संरक्षण अधिकारी की तरफ से ही उपायुक्त के समक्ष भेजा जाना है। हमने नियमों के अनुसार पात्र बच्चों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने के लिए तत्परता से कार्य करते हुए संबंधित अधिकारियों को फाइल भेज दी थी।
-सतेंद्र सिंह तंवर, सदस्य, जिला बाल कल्याण समिति भिवानी।