भिवानी: गुमनाम शहीदों की याद में स्कूल में लगाया गया पत्थर।
बवानीखेड़ा। गांव बलियाली के रणबांकुरे के बलिदान में गांव के सरकारी स्कूल में लगा पत्थर आज भी उनके बलिदान को बयां कर रहा है। हालांकि आज तो गांव में बलिदान देने वाले शहीदों के परिजन नहीं रहते हैं। न ही किसी को भी उनके नाम पता मालूम हैं। फिर भी उनके बलिदान की कहानी स्कूल के पुराने भवन में कमरों पर लगा पत्थर बयां कर रहा है ।
ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार तत्कालीन हिसार जिले का गांव बलियाली अंग्रेजों के शासनकाल में रांगड़ राजपूत बहुल गांव था। 1914 में शुरू हुए प्रथम विश्व युद्ध में यहां के जवानों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यहां के 418 जवानों ने युद्ध में भाग लिया परंतु उनमें से 18 लोग जिंदा नहीं लौटे। उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन गुमनाम शहीदों की याद में उस समय गांव के सरकारी स्कूल में पत्थर लगाया गया था जो आज भी मौजूद है।
ये है आज भी शहीदों की निशानी
पत्थर पर अंग्रेजी में स्पष्ट लिखा है: फ्रॉम दिस विलेज 418 मैन वेन्ट टू द ग्रेट वार 1914-1919 ऑफ दिज 18 गेव अप देयर लाइव्स अर्थात इस गांव के 418 लोग 1914- 1919 के महान युद्ध में गए थे। इनमें से 18 ने अपनी जान दे दी। गांव के युवाओं द्वारा दिए गए इस अविस्मरणीय बलिदान को याद कर आज भी लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
गांव बलियाली के जवानों में देश सेवा का जज्बा पुराने शुरू से ही था। बुजुर्ग बताते थे की प्रथम विश्व युद्ध में यहां के 418 लोगों ने भाग लिया था जिसमें से 18 लोग वापस नहीं लौटे। उनके बलिदान में ही गांव की सरकारी स्कूल में पत्थर लगाया गया था।
- सुदामा सोनी बुजुर्ग गांव बलियाली