11 गांव पूरे जिले के लिए अमन-चैन और भाईचारे का उदाहरण बने हैं। इन गांवों में विगत तीन से लेकर 14 साल के दौरान कभी ऐसी नौबत नहीं आई कि ग्रामीणों को पुलिस थाने जाना पड़ा हो। छोटे-मोटे मामलों को ग्रामीण मिल-बैठकर सुलझा लेते हैं। लोहारू थाना अंतर्गत गांव झांझड़ा हसनपुर के लोग पिछले 14 साल के दौरान कभी थाने नहीं गए। ग्रामीणों का मानना है कि थाने में जाने के बाद न केवल भाईचारा बिगड़ेगा बल्कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर में आर्थिक नुकसान भी होगा। खास बात यह है कि गांव के विवाद पंचायती स्तर पर ही निपटा लिए जाते है और वर्षों से कोई मामला थाने नहीं पहुंचा है।
ये हैं आदर्श बने गांव
झांझड़ा हसनपुर : लोहारू थाना क्षेत्र के तहत आने वाले इस गांव में पिछले 13-14 साल से कोई भी ग्रामीण थाने नहीं पहुंचा। न तो यहां कोई बड़ा विवाद हुआ और छोटे-मोटे झगड़े ग्रामीणों ने आपसी भाईचारे में निपटा लिए।
ढाणी कुशाल: करीब साढ़े चार साल पहले गांव के कुछ युवा हत्या के मामले में नामजद हुए। मगर बाद में बरी हो गए। इसके अलावा पिछले साढ़े चार के दौरान गांव में कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। ग्रामीण पंचायती फैसलों पर यकीन करते है और सभी विवाद पंचायती स्तर पर ही निपटा लिए जाते हैं।
लालावास : करीब 825 वोटों वाले इस गांव में पिछले आठ साल से कोई झगड़ा या अन्य विवाद का मामला थाने नहीं पहुंचा।यहां के ग्रामीण भी आपसी भाईचारे और पंचायती फैसलों में विश्वास करते है और विवादों को थाने-चौकी या कोर्ट-कचहरी में ले जाने की बजाए अपने स्तर पर निपटाते हैं।
सुखपुरा : पहले मुंढाल चौकी और अब बवानीखेड़ा थाने के तहत आने वाले सुखपुरा गांव के ग्रामीणों को याद नहीं कि वे अंतिम दफा थाने कब गए थे। ग्रामीणों की माने तो पिछले 10-12 साल तक तो पक्का गांव का कोई विवाद थाने नहीं पहुंचा है। सारे विवाद आपसी सहमति से बैठक या पंचायत कर निपटा लिए जाते है।
माईखुर्द : करीब 16 सौ की आबादी वाले इस गांव में पिछले 15-16 साल से कोई भी विवाद थाने तक नहीं पहुंचा है। करीब 15-16 साल पहले एक व्यक्ति की मौत मामले में परिजनों ने हत्या के आरोप लगाए थे मगर वह जांच में ह्दयघात निकला। इस घटना के 15-16 साल पहले भी यहां ये कोई मामला थाने नहीं पहुंचा है।
ये हैं प्रेरणा स्रोत गांव
थाना गांव
लोहारू गांव झांझड़ा हसनपुर
सिवानी गांव चनाना, देवसर, बख्तारपुर
बाढड़ा गांव माई खुर्द, कुब्जानगर
बौंद गांव जयश्री
बवानीखेड़ा सुखपुरा, ढाणी कुशाल, जयमलपुरा
तोशाम गांव लालावास
सम्मान के लिए बुलाया मगर नहीं हुए सम्मानित
आपराधिक घटनाओं को रोक गांव में भाईचारा स्थापित करने वाले इन 11 गांवों को पिछले सप्ताह हुए डीजीपी केपी सिंह के पंचायती राज में पुलिस की भूमिका कार्यक्रम में सम्मानित करने के लिए बुलाया गया। डीजीपी के भाषण के बाद इन पंचायतों को सम्मानित किया जाना था मगर भाषण खत्म होते ही अफरा तफरी मची और एक-दो पंचायतों को छोड़ बाकी किसी पंचायत को सम्मानित नहीं किया गया। स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी इन्हें सम्मानित करने की बात कही गई मगर सम्मानित नहीं किया गया। इसकी टीस गांव के सरपंचों के मन में भी है।