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धार्मिक आचरणों से युक्त हो गृहस्थ जीवन : आचार्य महाश्रमण

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हांसी रोड स्थित जी लिट्रा वैली स्कूल के विद्यार्थियों व अन्य श्रद्धालु आचार्य महाश्रमण के दर्शन - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। आचार्य महाश्रमण बुधवार प्रात: लगभग 13 किलोमीटर का विहार कर गांव लुहारी जाटू पहुंचे। विद्यालय परिसर में आयोजित मुख्य प्रवचन में उपस्थित लोगों को आचार्य ने कहा कि धर्म ऐसा तत्व है जो मानव के व्यवहार को और विशद बना देता है। साधु के लिए धर्म की बड़ी-बड़ी बातें बताई गई हैं तो सामान्य गृहस्थों के लिए भी धर्म की छोटी-छोटी बातें बताई गई हैं। उन्होंने कहा कि गृहस्थ का जीवन भी धार्मिक आचरण से युक्त होना चाहिए।
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आचार्य ने बताया कि अणुव्रत आंदोलन के माध्यम से आचार्य तुलसी ने इन्हीं छोटे-छोटे नियमों का प्रचार किया था, जिसे मानव अपने जीवन में धारण कर अपने जीवन को धर्म से भावित बना सकता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में गृहस्थों के लिए पहला धर्म बताया गया है सुपात्र में दान देना। गृहस्थ को जो साधु शुद्ध हो उसे दान देने का प्रयास करना चाहिए। वस्त्र, आहार आदि जो भी साधु को अपेक्षित हो तो गृहस्थ उसे सहज रूप में दान देकर धर्माचरण कर सकता है। उन्होंने कहा कि गृहस्थ को अपने जीवन में गुरुओं के प्रति भी विनय का भाव रखने का प्रयास करना चाहिए। सभी प्राणियों के प्रति दया और अनुकंपा की भावना रखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदमी यह सोचे कि यदि उसे सुख प्रिय है तो सभी प्राणियों को सुख प्रिय होता है। इसलिए अपने सुख के लिए किसी भी प्राणी को कष्ट देने का प्रयास न हो। बिना मतलब अथवा गुस्सा, लोभ, अहंकार के कारण किसी को कष्ट देने से बचने का प्रयास करना चाहिए।
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