भिवानी। छोटी काशी भिवानी में होली पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखकर होली पूजन किया व संतान की दीर्घायु की प्रार्थना की। महिलाओं ने खेतों में तैयार हुई नई फसल गेहूं, चने, जौ का भोग लगाया और अच्छी फसल की कामना की गई। गोबर से बने ढाल-बिड़कुले और नाल से भी पूजा कर प्राचीन परंपराओं के अनुसार परिक्रमा की गई। शहरभर में 40 से अधिक जगह होलिका का पूजन किया गया। वहीं देर शाम शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया। कोरोना केसों के चलते जिले में लागू धारा-144 का असर होली पर नहीं दिखा और महिलाएं टोलियों में पूजन करने पहुंची। बच्चे भी उनके साथ रहे।
शहर के नेहरू पार्क, खाकी बाबा मंदिर के पास, नया बाजार में भोजावाली माता मंदिर से आगे, कृष्णा कॉलोनी, हाउसिंग बोर्ड, सेक्टर 13, बैंक कॉलोनी, विकास नगर, हनुमान ढाणी, दादरी गेट, कन्हीराम अस्पताल के पास, विद्या नगर, बीटीएम चौक के पास, जागृति कॉलोनी आदि क्षेत्रों में होलिका पूजन हुआ। यहां दिनभर मेला लगा रहा। बच्चों ने खिलौने खरीदे।
महिलाओं की रही भीड़, लापरवाही पड़ न जाए महंगी
कोरोना का खतरा है और पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा। रविवार को भी आठ केस सामने आए। इसके बावजूद बाजारों में लापरवाही दिखी। शहर में जहां-जहां होलिका पूजन हुआ, वहां महिलाओं की भीड़ लगी रही। 10-10,15-15 महिलाओं की टोलियां बच्चों के साथ पूजन करने पहुंची। कोरोना काल में ऐसे लापरवाही महंगी पड़ सकती है।
कहीं रंग में भंग न डाल दे केमिकल रंग, इसलिए रखें सावधानी
बाजार में केमिकल युक्त रंगों की भरमार है। जो शरीर खासकर आंखों और स्किन को काफी नुकसान पहुंचा सकते है। इन दिनों सस्ते केमिकल युक्त रंग की बाजार में भरमार है और काफी रंगों में पीसा हुए कांच का भी प्रयोग किया जा रहा है। रंगों के त्योहार में भग ना पड़े इसके लिए सावधानी जरूरी है। सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. आशीष सांगवान ने इसके लिए जरूरी सलाह दी।
आंखों और स्किन के लिए घातक है केमिकल वाले रंग
1. होली खेलते समय आंखों के अंदर रंग जाने का सबसे अधिक खतरा रहता है। आंखों में रंग जाने से जलन होना और लाल होना सामान्य बात है। इसके अलावा केमिकल से बना रंग आंखों के अंदर जाने से रोशनी भी जा सकती है।
2. केमिकल युक्त रंग त्वचा को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। रंग लगने के बाद खुजली, दाग पड़ जाना और सूजन आना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। वहीं, स्किन कैंसर का खतरा बना रहता है।
3. सूखा रंग सांस और दमे जैसी बीमारियों को जन्म देता है। सूखा रंग हवा में मिलकर आपके नाक और मुंह के जरिए शरीर के अंदर पहुंच जाता है। जो कि दमा और सांस जैसी बीमारियों को जन्म देता है।
4. बाजार में बिक रहे केमिकल से बने रंग बालों को प्रभावित करते हैं। बालों में रंग लगने के बाद बाल झडने, डैंड्रफ जैसी कई समस्याएं होती है।
होली खेलते समय रखें सावधानी
- प्राकृतिक रंगों यानी हर्बल कलर्स का इस्तेमाल करें।
- पूरी बाजू के कपड़े पहने
- रंगों से खेलने से पहले शरीर पर तेल लगाएं। ऐसा ही बालों के लिए भी करें। बेहतर होगा कि नारियल तेल का इस्तेमाल किया जाए। इससे रंग स्किन को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
- ज्यादा गहरे रंगों के इस्तेमाल से बचे
- होली खेलने के बाद या दौरान अगर त्वचा में जलन हो, आंखों में धुंधलापन या खुजली हो या फिर सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
- बहुत देर तक पानी में न रहें। बच्चों का ध्यान इस मामले में ज्यादा रखें।
- कान में भी पानी न जाने दें। केमिकल वाले कलर्स का पानी आपके कान को भी नुकसान पहुंचा सकता है।
चौक-चौराहों पर दिखी पुलिस, हुड़दंगियों को रोकना बड़ी चुनौती
सार्वजनिक स्थानों पर होली कार्यक्रमों पर रोक और जिला प्रशासन की ओर से धारा 144 लागू करने के बाद पुलिस प्रशासन ने भी होली और दुल्हेंडी के लिए 27 अतिरिक्त नाके लगाकर हुड़दंगियों को रोकने की योजना बनाई थी। होली पर शहर में मुख्य चौक-चौराहों पर तो पुलिस नजर आई मगर विशेष नाके नहीं दिखे। ऐसे में दुल्हेंडी के दिन हुड़दंगियों को रोकना पुलिस के लिए चुनौती रहेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दुल्हेंडी के दिन सुबह से ही सभी निर्धारित नाकों पर पुलिस टीमें नजर आएंगी और जिन पुलिस टीमों की गश्त की ड्यूटी लगाई है, वे भी गश्त करेंगी।
नेहरू पार्क में होलिका पूजन करतीं महिलाएं। संवाद- फोटो : Bhiwani