भिवानी. बेटे के हाथ और पांव झुलसने के बाद 25 साल संघर्ष किया, तब कहीं जाकर आत्माराम डेरोलिया अपने घर की छत पर मंडरा रहे खतरे से निजात पा सके।
लेकिन, शहर की आधा दर्जन कॉलोनियों के हजारों बाशिंदे अब भी इस खतरे के साये में जी रहे हैं। लोगों ने आवाज भी उठाई, लेकिन नियमों का हवाला देकर बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच निकलता है।
शहर की आधा दर्जन से ज्यादा कॉलोनी के लोग हाईटेंशन तार की वजह से अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। इन कॉलोनियों के नाम हैं- डीसी कॉलोनी, विद्या नगर, डाबर कॉलोनी, जीतूवाला जोहड़ इलाका, ढाणा रोड आदि। यूं तो कॉलोनी-बस्ती और भी हैं, लेकिन उक्त कॉलोनियों में दिक्कत ज्यादा है। सालभर के दौरान 3-4 हादसे भी हो चुके हैं। एक-दो स्कूलों के प्ले ग्राउंड तक हाई टेंशन तारों के नीचे पड़ते हैं। क्षेत्र के एक स्कूल के ऊपर से 33 हजार केवी की लाइन गुजर रही है।
पुराने शहर के इलाकों में हालांकि हाईटेंशन तार परेशानी का सबब नहीं हैं, लेकिन जितने पुराने खंभे हैं, उनके कारण लोग परेशान हैं। सड़कों का लेवल ऊपर होने की वजह से पुराने खंभों की ऊंचाई कम हो गई और तार नीचे हो गए। कई जगह तारों की ऊंचाई बमुश्किल 8-10 फुट रह गई है। पिछले महीने राम नगर कॉलोनी में तार नीचे होने की वजह से आग लगने के बबाद फायर ब्रिगेड गली में नहीं जा सकी।
केस : एक
1987 में जख्म मिला, 2013 में राहत
डीसी कॉलोनी में रहने वाले आत्माराम डेरोलिया को दो जुलाई 1987 का वह दिन आज भी याद है। घर के ऊपर से गुजरने वाली हाईटेंशन तार के करंट की जद में आकर उनके 10 वर्षीय बेटे आलोक का एक हाथ और एक पांव बुरी तरीके से झुलस गया। कई महीने अस्पतालों में गुजारने के बाद आलोक की स्थिति में कुछ सुधार हुआ तो आत्माराम ने तार को हटवाने के लिए मुहिम शुरू की। डीसी ऑफिस में असिस्टेंट रहे आत्माराम बताते हैं कि बिजली विभाग व सरकार को दो सौ से ज्यादा चिट्ठी लिखी। कष्ट निवारण समिति में कई बार मामला उठाया। धरने-प्रदर्शन भी किए, लेकिन विभाग नहीं पसीजा। लंबी जद्दोजहद के बाद 2013 में तार हटे। वे बताते हैं कि उनके यहां तो तार हट गए, लेकिन कॉलोनी और शहर की कई बस्तियों में आज भी बिजली के तार लोगों के जीवन के लिए खतरा बने हैं।
30 साल पहले हाई टेंशन तारों से मिले जख्मों को दिखाते हुए आलोक
बेटा गंवाया, लेकिन तार अब भी वहीं
करीब 14 साल पहले घर के बाहर तारों की चपेट में आने की वजह से दिनोद गेट पुलिस चौकी क्षेत्र में रहने वाले गोविंद राम ने अपने बेटे को खोया। गोविंद राम बताते हैं कि हालांकि उन्होंने कभी तारों को हटवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया, लेकिन वे तार आज भी जस की तस हैं, जिनकी वजह से उनको अपना बेटा गंवाना पड़ा।
बिजली विभाग ने 200 को भेजे नोटिस
ऐसा नहीं है कि बिजली के तारों से खतरे के लिए केवल विभाग जिम्मेदार है। वरन, वे लोग भी जिम्मेदार हैं, जो अतिक्रमण कर अपने मकान के छज्जे को बिजली के तारों के करीब तक ले जाते हैं। विभाग के एक जेई ने बताया कि पखवाड़े भर पहले विभाग ने ऐसे दो सौ से ज्यादा लोगों को नोटिस भेजे हैं।
खतरनाक तारों के संदर्भ में विभाग सर्वे करा चुका है। इन तारों को जल्द ही हटाने या फिर कोई दूसरे विकल्पों से समाधान खोजा जाएगा। चूंकि, इस काम में लंबे समय तक आपूर्ति बंद रखी जाएगी। लेकिन, गर्मी मौसम में ऐसा संभव नहीं है। आगे जब मौका मिलेगा, तब विभाग खंभों और तारों का लेवल ठीक कर देगा।
रणवीर सिंह, कार्यकारी अभियंता, भिवानी