बवानीखेड़ा(भिवानी)। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने बवानीखेड़ा क्षेत्र के गांव सुमराखेड़ा में आबादी क्षेत्र के बीच स्थित गंदे और खुले तालाब को लेकर दायर शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए इसे मानव गरिमा और जीवन के अधिकार पर सीधा प्रहार बताया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सुरक्षा उपायों के अभाव में तीन नाबालिग बच्चों की डूबकर मृत्यु होना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का भयावह परिणाम है।
आयोग के सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन के समक्ष आई शिकायत के अनुसार गांव सुमराखेड़ा के घनी आबादी वाले क्षेत्र के बीच वर्षों से गंदे और सड़े हुए पानी से भरा एक खुला तालाब मौजूद है। जो ग्रामीणों के लिए “मौत का जाल” बन चुका है। न तो तालाब के चारों ओर कोई बाड़, चेतावनी संकेत या चारदीवारी बनाई गई और न ही बार-बार शिकायतों के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी ने इसे सुरक्षित करने की आवश्यकता समझी। परिणामस्वरूप तीन मासूम बच्चों की जान चली गई, जिसने पूरे गांव को सदमे और भय के माहौल में धकेल दिया। आयोग ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ठहरे हुए गंदे पानी से उठती दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और संक्रामक बीमारियों का खतरा ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
अपने आदेश में आयोग के सदस्य जैन ने कहा कि ऐसे हालात भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का गंभीर उल्लंघन हैं, जिसमें प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित, स्वच्छ और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है। आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि बच्चों जैसे अत्यंत संवेदनशील वर्ग की सुरक्षा सुनिश्चित न करना संविधान के नीति निदेशक तत्वों के अनुच्छेद 39 (ई) एवं (एफ) के प्रति राज्य के कर्तव्यों से मुंह मोड़ने के समान है। आयोग के सदस्य कुलदीप जैन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि ग्राम पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक को बार-बार चेताने और शिकायत देने के बावजूद किसी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने ने इसे “प्रशासनिक उदासीनता का क्रूर चेहरा” बताते हुए कहा कि जब व्यवस्था आंखें मूंद लेती है, तब उसकी कीमत निर्दोष नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलदीप जैन ने उपायुक्त भिवानी को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए तत्काल सुरक्षा उपाय लागू करने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने ग्राम पंचायत सुमराखेड़ा को तालाब की तत्काल घेराबंदी, उसे भरने अथवा सुरक्षित करने और गांव में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त करने के आदेश भी दिए हैं। साथ ही बीडीपीओ, डीडीपीओ एवं अतिरिक्त उपायुक्त को सतत निगरानी, विभागीय समन्वय और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं।
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सुनवाई से एक सप्ताह पूर्व विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट की आयोग ने तलब
असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों और गंभीर आरोपों को देखते हुए आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि मानव जीवन और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई या टालमटोल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई दो अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने यह दोहराया कि नागरिकों की जान की कीमत पर किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है और मानव गरिमा की रक्षा के लिए आयोग हर आवश्यक कदम उठाएगा।
-कुलदीप जैन, सदस्य, हरियाणा मानवाधिकार आयोग
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दलदली तालाब के अंदर धंस गई संवेदनाएं, जिम्मेदार उदासीन
गांव सुमराखेड़ा के बीचों बीच में गंदे पानी का तालाब ग्रामीणों के लिए समस्या बन चुका है। जिसके दलदली पानी के अंदर संवेदनाएं धंस चुकी हैं। पिछले दिनों आई बारिश के बाद तो तालाब में दलदल हो गई हैं जिसके कारण किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है। ग्रामीण अपने बच्चों और पशुओं को इस तालाब के नजदीक नहीं जाने देते, लेकिन जाने अनजाने किसी भी समय यह हादसे का न्योता दे सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि इसकी सफाई और चहारदीवारी को लेकर वो प्रशासन से पहले भी गुहार लगा चुके हैं। वहीं गंदे पानी की दुर्गंध के कारण गंदे पानी के तालाब के आस पास रहने वालों का जीवन दूभर हो गया है। वहीं इस गंदे पानी से बीमारियों के फैलने का भी खतरा मंडराने लगा है।
गांव के गंदे तालाब को लेकर पंचायत के माध्यम से खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से मिलकर मांग रखी गई है। जिसमें तालाब की चहारदीवारी और सफाई के बारे में लिखा गया है। प्रशासन के अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस तालाब की जाल लगाकर सफाई का कार्य करवा दिया जाएगा।
-बिमला देवी, सरपंच, गांव सुमराखेड़ा।
मेरे द्वारा कई बार पंचायत और प्रशासन के अधिकारियों को इस गंदे पानी के तालाब के बारे में लिखित में अवगत कराया है। करीब 5 साल पहले प्रवासी मजदूरों के तीन बच्चे इसमें डूब कर मर गए। पुलिस कार्रवाई के डर से वो मजदूर रात में ही चले गए। मेरे द्वारा इस बारे में मानवाधिकार आयोग को शिकायत दी गई है, जिसके बाद प्रशासन के अधिकारियों की नींद टूटी है।
-राजकुमार कोठारी, अधिवक्ता, शिकायतकर्ता
ये बोले ग्रामीण
गांव में इस गंदे पानी के तालाब के कारण किसी भी समय कोई भी हादसा हो सकता है। प्रशासन को इस गंदे पानी की निकासी का कोई उचित और स्थायी समाधान करना चाहिए।
-सूरजभान नंबरदार
गांव के इस गंदे पानी के तालाब के नजदीक हम किसी भी बच्चे और पशुओं को नहीं जाने देेते। इसमें जमीन दलदली हो चुकी है जिससे गांव में किसी भी अनहोनी घटना को लेकर भय का माहौल है।
-ईश्वर सिंह (मौजूदा सरपंच प्रतिनिधि के भाई )
गांव के तालाब को प्रशासन और पंचायत सही ढंग से सफाई करवाकर इसकी चहारदीवारी करवाए ताकि कोई अनहोनी घटना ना घटे और कोई बीमारी भी ना फैले।
-पवन कुमार ग्रामीण