प्रकृति में अत्यधिक दोहन की वजह से आ रहे बदलावों का बुरा असर भूमिगत जलस्तर पर भी पड़ा है। लेकिन भिवानी व चरखी दादरी जिला में एक साल के भू वैज्ञानिकों के सर्वेक्षण रिपोर्ट में सामने आए नतीजों से स्थिति में काफी सुधार दर्शाया गया है। चरखी दादरी के बाढड़ा ब्लॉक को अब भी नोटिफाई एरिया (डार्क जोन) में माना जा रहा है, जबकि बहल, तोशाम, लोहारू व बौंद के जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। जबकि भिवानी ब्लॉक के अलावा बवानीखेड़ा, तोशाम, कैरू, सिवानी व झोझू ब्लॉक के भूमिगत जलस्तर में काफी सुधार आया है। जून 2018 से जून 2019 तक भू वैज्ञानिकों की सर्वेक्षण रिपोर्ट में एक मीटर के मुकाबले भूमिगत जल स्तर में 0.85 तक सुधार दर्ज किया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की भूमि जल कोष के सहायक भू-वैज्ञानिक कार्यालय द्वारा हर साल भूमिगत जलस्तर की जांच की जाती है। अब तक पानी की जांच में भिवानी जिला के तीन से चार जोन में स्थिति काफी नाजुक दौर में मानी जा रही थी, जिसमें चरखी दादरी का बाढड़ा ब्लॉक और भिवानी का सिवानी और बहल ब्लॉक शामिल रहा है। लेकिन बहल में अब भिवानी जिले के सभी ब्लॉक में भूमिगत जलस्तर में काफी सुधार दर्ज किया गया है।
भिवानी व चरखी दादरी के अधिकांश ब्लॉक में कृषि और पेयजल जरूरतें आज भी भूमिगत जल पर ही निर्भर हैं। खेतों में ट्यूबवेल से लेकर पेयजल सप्लाई के लिए भी पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा काफी गांवों में ट्यूबवेल व बोरवेल लगाए हुए हैं, जिन तक लोगों की पीने के पानी की जरूरतें पूरी होती हैं। पीने के पानी का स्वाद और उसकी गुणवत्ता की भी जांच की जाती है। क्योंकि अगर पानी के स्वाद में बदलाव आता है तो इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी पड़ता है। यही वजह है कि पानी का स्तर जितना नीचे गिरेगा, उतनी ही पानी की गुणवत्ता पर भी इसका बुरा असर आएगा। यही वजह है कि कई ब्लॉक में तो लोगों के पीने लायक भी पानी नहीं रहा था और इसका कृषि इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा था।
ये है भिवानी व चरखी दादरी के ब्लॉक स्तर पर भूमिगत सुधार के तुलनात्मक आंकड़े
ब्लॉक का नाम जून 2018 जून 2019 (आंकड़े मीटर में हैं)
1. भिवानी 5.6 4.82
2. बवानीखेड़ा 5.31 4.01
3. तोशाम 12.66 12.77
3. लोहारू 62.95 63.27
4. कैरू 21.87 21.62
5. सिवानी 22.55 22.13
6. बहल 64.32 64.47
चरखी दादरी जिला के ब्लॉक
1. बाढड़ा 65.49 65.66
2. दादरी 9.65 9.05
3. बौंद 3.48 2.81
4. झोझू 38.48 38.51
जून 2018 से जून 2019 की तुलनात्मक सर्वेक्षण रिपोर्ट में अधिकांश ब्लॉक में भूमिगत जलस्तर में औसतन 0.85 का सुधार दर्ज किया गया है। ये लोगों की जागरूकता की वजह से ही संभव हुआ है। जमीनी पानी का सदुपयोग के अलावा जल संसाधनों का सही इस्तेमाल और सरकार की प्रोत्साहन योजनाओं की वजह से जमीनी पानी का लेवल ऊपर आया है। जो काफी अच्छे संकेत हैं।
- चंद्रप्रकाश, सहायक भू-वैज्ञानिक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।