बस स्टैंड पर निजी परमिटों के विरोध में दो घंटे का सांकेतिक प्रदर्शन करते रोडवेज कर्मी।
भिवानी। हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ एवं ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर फेडरेशन के आह्वान पर शुक्रवार को भिवानी डिपो में दो घंटे का विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान यूनियन नेताओं ने सरकार से निजीकरण का रास्ता छोड़ रोडवेज के बेड़े में 10 हजार सरकारी बसें शामिल कर 60 हजार बेरोजगारों को रोजगार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की मांग की।
प्रदर्शन की अध्यक्षता डिपो प्रधान अनिल फौजी ने की और संचालन अनिल नागर ने किया। राज्य प्रधान नरेंद्र दिनोद और राज्य उप महासचिव पवन शर्मा ने कहा कि 16 जून को परिवहन मंत्री के साथ हुई वार्ता में मंत्री ने रोडवेज के बेड़े में 500 बसें और खरीदने की घोषणा की थी। साथ ही कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा बैठक करने का आश्वासन दिया था।
यूनियन नेताओं ने सरकार से 62 रुपये 37 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से निजी परमिट और निजी इलेक्ट्रिक बसें चलाने के निर्णय को वापस लेने तथा 362 रूटों पर 3648 निजी परमिट देने के फैसले को रद्द करने की मांग की। नरेंद्र दिनोद ने कहा कि एक इलेक्ट्रिक बस के स्थान पर छह साधारण बसें खरीदी जा सकती हैं। प्रदेश के सभी डिपो में 50-50 इलेक्ट्रिक बसें लेने के निर्णय के स्थान पर 300-300 साधारण बसें शामिल की जा सकती हैं।
इससे हरियाणा में करीब 7200 से अधिक बसें उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि एक बस से छह बेरोजगारों को रोजगार मिलता है। इस हिसाब से सरकारी बसों के माध्यम से 43, 200 बेरोजगारों को रोजगार मिल सकता है और जनता को बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध होगी। इस मौके पर जसवंत सिंह एसएसआई, कुलदीप नंबरदार, सोनू प्रजापत, रामकिशन, कुलदीप प्रधान, दयानंद, अशोक प्रेमनगर, गुलशन, सोनू लखेरा, राकेश दहिया मौजूद रहे।