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20 दिन में ही 5911 किसानों का सरकार ने 45518 एमटी गेहूं खरीदा, 92.57 करोड़ का किया भुगतान

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नई अनाजमंडी में गेहूं की भराई करती महिला मजदूर। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। रबी सीजन की फसल खरीद का सीजन इस बार 20 दिन में ही सिमट गया। जबकि नियम के अनुसार डेढ़ माह तक सरकार किसानों की फसल खरीद करती है। भिवानी जिले में 5911 किसानों का सरकार ने 45518 मीट्रिक टन गेहूं खरीद डाला, जिसकी एवज में किसानों के खाते में 92.57 करोड़ का भुगतान भी कर दिया। अब मंडियों में न गेहूं की सरकारी खरीद है न किसी किसान का कोई बकाया खड़ा है। इस बार मंडी केवल 30 फीसदी फसल की सरकारी खरीद कर पाई। जबकि प्राइवेट तौर पर गेहूं और सरसों की बंपर खरीद हुई है। गेहूं की बहुत कम खरीद होने की वजह से गरीबों के लिए चलाई जा रही अन्न कल्याण परियोजनाओं पर भी संकट आ सकता है।
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भिवानी जिला मुख्यालय सहित जिले की 11 मंडियों में गेहूं खरीद निर्धारित की गई, मगर कुछ मंडियों मेें ही किसानों का गेहूं पहुंचा। जिसमें कई मंडियों में तो खरीद का खाता ही नहीं खुला। जिला मुख्यालय की मंडी में उम्मीद से कहीं कम गेहूं की आवक हुई। अब तक सभी खरीद एजेंसियों ने जिले के 5911 किसानों का 45518 मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद की। इन किसानों के खाते में सरकार ने 92.57 लाख रुपये की राशि का भी भुगतान कर दिया। सरकार के निर्देशानुसार 15 मई तक मंडियों में गेहूं की सरकारी खरीद होनी थी, लेकिन भिवानी में 20 दिन में ही सरकारी खरीद सीमट गई। फिलहाल सरकारी खरीद कि मियाद 25 मई तक की गई है। अब मंडियों में इक्का दुक्का गेहूं की आवक हो रही हैं, लेकिन ये आवक भी आढ़तियों की प्राइवेट खरीद पर निर्भर हैं, जबकि सरकारी एजेंसी के पास कोई भी किसान गेहूं लेकर नहीं आ रहा है। हालांकि मंडियों में किसानों को गेट पास देकर गेहूं की सरकारी और प्राइवेट खरीद कराई जा रही है। जिन किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल का रजिस्ट्रेशन कराया था, वे किसान भी सरकार को गेहूं देने के बजाय बाहर गेहूं बेच अगली फसल लेने की तैयारियों में जुटे हैं।
किसानों व आढ़तियों को होगा निर्यात पर रोक से नुकसान
सरकार ने हरियाणा से गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। जबकि खरीद 15 मई से 25 मई तक बढ़ा दी है। सरकार के इस निर्णय से आढ़तियों और किसानों को काफी नुकसान होगा। भिवानी अनाज मंडी में ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के प्रधान राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि फिलहाल मंडियों में गेहूं की आवक पूरी हो चुकी है। अब किसान सरकार को अपना गेहूं नहीं देंगे। क्योंकि सरकार ने एमएसपी 2015 निर्धारित किया है, जबकि मार्केट में गेहूं का भाव 2150 है। गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने के बाद गेहूं के दामों में कमी आएगी। जिसका सीधा नुकसान आढ़तियों और किसानों को होगा। इस बार गेहूं के उत्पादन में काफी मंदी थी, जिसकी वजह से तूड़े का भाव भी आसमान छू रहा है। अब निर्यात पर रोक लगने से किसानों और भंडारण करने वाले व्यापारियों को भी नुकसान झेलना पड़ेगा।
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जिले में सरकारी खरीद लगभग पूरी हो चुकी है। जिन किसानों का एजेंसियों ने गेहूं खरीदा हैं, उन सभी का भुगतान भी किसानों के बैंक खातों में किया जा चुका है। इस बार काफी कम आवक रही है, इसी वजह से खरीद सीजन पहले ही पूरा हो गया है।
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-अनिल कालरा, नोडल अधिकारी एवं जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक भिवानी।
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