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खेलों में सोना-चादी, स्वच्छता में कांस्य भी नहीं

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नेहरू पार्क की पिछली दीवार के पास लगा कचरे का ढेर। संवाद - फोटो : Bhiwani
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नवनीत शर्मा
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भिवानी। मिनी क्यूबा के नाम से प्रसिद्ध छोटी काशी के खिलाड़ी आज हर खेल में सोने, चांदी के तमगे जीत रहे हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था के नाम पर स्वच्छता सर्वे में शुरू किए प्लेटिनम, गोल्ड, सिल्वर और ब्रांज मेडल की तालिका में हमारी दौड़ इतनी पिछड़ गई कि छोटी काशी की झोली खाली रह गई। शनिवार को आए स्वच्छता सर्वे 2021 के परिणाम में भिवानी शहर का पिछले चार साल का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। शहर में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और सड़कों पर उड़ रही धूल की वजह से देशभर में शहर की 244वीं रैंकिंग आई है।
नप ने किया हर संभव प्रयास
सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर हर संभव प्रयास किया था। नगर परिषद ने शहर के कचरा केंद्रों को खत्म कर उस जगह पर आमजन के बैठने के लिए सीमेंट की कुर्सियों लगाई थी। साथ ही शहर के मुख्य चौक-चौराहों, पार्क के पास में कूड़ेदान भी रखवाएं थे, ताकि लोग उनमें कचरा डाल सकें। इसके अलावा टिपर के माध्यम से शहरी के सभी वार्डों से डोर टू डोर सूखा और गील कचरा अलग-अलग लेकर आने की व्यवस्था भी की हुई है।
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चार साल की सबसे खराब रैंक
वर्ष 2017 में हुए पहले स्वच्छता सर्वे में भिवानी 345वें स्थान के साथ सबसे गंदे शहरों में स्थान था। वर्ष 2018 में 105 रैंकिंग की छलांग लगाई थी, जब 345 से सीधे 240वें स्थान पर पहुंचा था। इसके बाद वर्ष 2019 में भी सुधार रहते हुए 232वीं रैंकिंग हासिल की। वहीं अगर वर्ष 2020 की बात करें तो 166वें रैंकिंग के साथ शहर में काफी सुधार हुए। मगर इस साल शहर 78 रैंक पीछे होते हुए देश में 244वें रैंकिंग पर पहुंच गया है, जोकि विचारणीय विषय है।
6000 अंकों के आधार पर हुआ सर्वेक्षण
देश के एक से 10 लाख तक की आबादी के 382 शहरों पर सर्वेक्षण हुआ था। जिनमें कुल अंक छह हजार निर्धारित किए गए थे। इसमें 1500 अंक आमजन का फीडबैक पर निर्भर थे तो 1500 अंक नगर परिषद की ओर से शहर वासियों को दी जा रही सुविधाओं डोर-टू डोर कचरा उठान जैसी सेवाओं के। 1500 अंक स्वच्छता सर्वे तहत आने वाली केंद्रीय टीम के निरीक्षण के निर्धारित किए गए थे। इसके अलावा 1500 अंक कचरा निस्तारण, ओडीएफ, ओडीएफ प्लस जैसी सुविधाओं के थे।
सफाई कर्मचारियों की कमी भी बनी बड़ी समस्या
शहर में सफाई करने के लिए नगर परिषद के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं है। इसकी वजह से शहर का सुंदरीकरण होते-होते हर बार ही रुक जाता है। नप के पास फिलहाल 115 नियमित और पालिका रोल पर 158 सफाई कर्मचारी है। इन कर्मचारियों के कंधों पर शहर की ढाई लाख जनसंख्या है, जिस जनसंख्या के हिसाब से शहर में कम से कम 550 से 600 कर्मचारी होने जरूरी है। नगर परिषद में सफाई कर्मचारियों की नई भर्ती के बाद ही शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार देखने को मिल सकता है।
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अब तक की रैंकिंग
वर्ष रैंकिंग
2017 345
2018 240
2019 232
2020 166
2021 244
शहर को स्वच्छ बनाए रखना हर नागरिक का कर्तव्य
शहर को स्वच्छ बनाए रखना हर नागरिक का परम कर्तव्य है। नगर परिषद की ओर से शहर में सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए समय पर सफाई करवाई जाती रही है। साथ ही शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर कूड़ेदान भी रखवाए गए मगर सामान्य देखने में मिला है कि लोग अकसर कचरे को बाहर ही फेंक देते हैं, जोकि गलत है। ऐसे में शहर की सफाई में हर नागरिक की भागीदारी होनी आवश्यक है। शहर की टूटी सड़क, सड़कों पर उड़ती धूल भी स्वच्छता के बीच एक दीवार बन गई है।
- विकास देशवाल, सफाई निरीक्षक, नगर परिषद भिवानी।
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