भिवानी। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच दिन की हल्की गर्मी और सुबह-शाम की ठंड से सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार और गले के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार इस दौरान शरीर को बदलते तापमान के अनुकूल होने में परेशानी हो सकती है।
इसलिए बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह और रात के समय तापमान गिरने तथा दिन में धूप निकलने से ठंड और गर्मी का अंतर बढ़ जाता है। ऐसे में ठंड से बचाव न करने, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने और हाथों की स्वच्छता का ध्यान न रखने से श्वसन संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। प्रदूषण भी सांस की तकलीफ और अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतिन गुप्ता के अनुसार इस मौसम में मरीजों को सुस्ती, मांसपेशियों में खिंचाव, हल्का या तेज बुखार, छींकें आना, नाक बंद होना और गले में खराश जैसी शिकायतें हो रही हैं। कुछ लोगों को गले में चुभन, कफ और भारीपन महसूस होता है जबकि अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। खानपान में लापरवाही से पेट संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
ऐसे करें बचाव
डॉ. गुप्ता ने बताया कि मौसमी संक्रमण से बचने के लिए ताजा, संतुलित और पौष्टिक भोजन करें। आहार में संतरा, नींबू जैसे विटामिन-सी से भरपूर फल शामिल करें। अदरक, हल्दी और तुलसी का सेवन सामान्य आहार का हिस्सा हो सकता है लेकिन इन्हें संक्रमण का इलाज न मानें। पर्याप्त पानी पीते रहें, गुनगुना पानी गले को आराम दे सकता है।
ठंड से बचाव और साफ-सफाई जरूरी
सुबह-शाम ठंड के समय शरीर को ढकने वाले गर्म कपड़े पहनें और बाहर निकलते समय अचानक ठंडी हवा के संपर्क से बचें। बाहर से आने के बाद और भोजन से पहले साबुन से हाथ धोएं। घर में पर्याप्त हवा आने-जाने की व्यवस्था रखें और बीमार व्यक्ति के साथ बर्तन साझा करने से बचें। ठंडे पेय पदार्थों से परहेज करना जरूरी नहीं लेकिन जो चीजें गले में परेशानी बढ़ाती हों, उनसे बचें।
नींद पूरी लें, गंभीर लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद लें और संतुलित आहार के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें। यदि तेज बुखार लगातार बना रहे, हालत बिगड़ने लगे या सांस लेने में अधिक परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। बिना सलाह एंटीबायोटिक न लें और चिकित्सक द्वारा दी गई दवाएं निर्देशानुसार लें। समय पर उपचार और सावधानी से बीमारी की जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।