भिवानी। हरियाणा पुलिस में भ्रष्टाचार, अवैध हिरासत और अमानवीय यातनाएं देने का मामला सामने आया है। मामला भिवानी शहर थाना के अंतर्गत आने वाली दिनोद गेट पुलिस चौकी का है। हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण की जांच में पुलिस विभाग के पांच कर्मचारियों को रिश्वतखोरी, अवैध हिरासत और अमानवीय यातनाएं देने का दोषी पाए जाने खुलासा कर उनके निलंबन और एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की है।
पुलिस शिकायत प्राधिकरण ने अपनी जांच रिपोर्ट हरियाणा सरकार के अतिरिक्त गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक हरियाणा और पुलिस अधीक्षक भिवानी को भी भेजी है। भिवानी जिले के गांव बामला निवासी बाला देवी ने बताया कि पांच जून 2023 को उसके 19 साल के लड़के प्रशांत को दिनोद गेट पुलिस चौकी की पुलिस ने स्कूटी चोरी के झूठे केस में अवैध हिरासत में लिया था। जिला नागरिक अस्पताल भिवानी परिसर से उसके बेटे के साथ ही उसके तीन से चार दोस्तों को भी पुलिस ने अवैध हिरासत में लिया। इसके बाद जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो वे पुलिस चौकी में पहुंचे। उस समय दिनोद गेट पुलिस चौकी में तैनात एएसआई दशरथ, एएसआई धर्मबीर, एचसी नफे सिंह, एचसी नरेश, एसपीओ जसबीर पर प्रत्येक युवक को छोड़ने के नाम पर 40 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप लगे।
जिन युवकों के परिजनों ने रिश्वत के पैसे दे दिए, उन्हें छोड़ दिया, लेकिन प्रशांत के परिजनों ने रिश्वत के पैसे नहीं दिए तो उस पर स्कूटी चोरी का झूठा केस दर्ज किया और उसे छह जून से दस जून तक अवैध हिरासत में रखकर अमानवीय यातनाएं दी गईं। बामला निवासी बाला देवी ने छह मार्च 2024 को पुलिस कर्मचारियों द्वारा रिश्वतखोरी के चलते बेटे को अवैध हिरासत में रखकर अमानवीय यातनाएं देने की शिकायत सीएम विंडो, डीजीपी हरियाणा व मानवाधिकार को दी, लेकिन इस मामले में भी काफी समय बीत जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बाला देवी ने मामले की शिकायत हरियाणा राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण को दी। जिसके बाद पुलिस शिकायत प्राधिकरण के तीन अधिकारियों ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की। जांच में दिनोद गेट पुलिस चौकी में तैनात पांच पुलिस कर्मचारी एएसआई दशरथ, एएसआई धर्मबीर, हेडकांस्टेबल नफे सिंह, हेडकांस्टेबल नरेश व स्पेशल पुलिस अधिकारी जसबीर को रिश्वतखोरी, अवैध हिरासत और अमानवीय यातनाएं देने का दोषी पाया गया। प्राधिकरण ने अपनी जांच रिपोर्ट हरियाणा सरकार के अतिरिक्त गृह सचिव, डीजीपी हरियाणा व पुलिस अधीक्षक भिवानी को भेजकर इन पांचों पुलिस कर्मचारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराए जाने की सिफारिश की है।
प्राधिकरण की जांच में यह भी खुला राज
पुलिस प्राधिकरण की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि स्कूटी चोरी के झूठे केस में प्रशांत को पुलिस ने फंसा तो दिया, जबकि अन्य आरोपियों को रिश्वत लेकर छोड़ दिया, जबकि प्रशांत को वाहन चलाना ही नहीं आता। ऐसे में वह चोरी के वाहन को अकेला चलाकर कैसे लेकर जाता।
प्राधिकरण की जांच में हुआ पुलिस के रैकेट का भी खुलासा : बृजपाल सिंह परमार
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ये पांच पुलिस कर्मचारी युवाओं को झूठे केस में फंसाने और रिश्वतखोरी कर उन्हें अमानवीय यातनाएं देने का रैकेट चला रहे हैं। पुलिस का ऐसा रवैया युवा पीढ़ी के साथ-साथ समाज के लिए भी बेहद खतरनाक है। ऐसा करना किसी युवा के भविष्य को बर्बाद कर उसे अपराध की तरफ धकेलना है। ऐसे मामलों में हरियाणा सरकार और पुलिस महानिदेशक को भी ठोस कार्रवाई के लिए तत्परता से कदम उठाने चाहिए।