बहल। राजस्थान के रूपलीसर गांव में शोक के लिए जा रहे पिकअप में मारे गए तीन महिलाओं सहित पांच लोगों का सोरड़ा गांव में अंतिम संस्कार किया गया। गांव में जब एक साथ पांच चिताएं जलीं तो पूरा गांव गमगीन हो गया। इससे पहले हादसे में मृतक तीन लोगों का राजस्थान के चुरू में जबकि एक का सीकर के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम किया। एक मृतक ने जयपुर में जाकर दम तोड़ा तो उसका जयपुर अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ।
रविवार को राजस्थान के रूपलीसर गांव में जाते समय हुए हादसे के समय पिकअप गाड़ी में 19 लोग सवार थे। इनमें 15 हरियाणा के जबकि चार लोग राजस्थान के ददरेवा गांव से थे। जैसे ही पिकअप बुचावास गांव के समीप पहुंची तो सामने से आ रहे एक ट्रक का टायर फट गया और वह अनियंत्रित होकर पिकअप से जा टकराया। टक्कर में पिकअप में सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में बहल क्षेत्र के सोरड़ा गांव की तीन महिलाएं व एक बच्चे सहित पांच लोगों ने दम तोड़ दिया।
वहीं हादसे की सूचना जैसे ही गांव पहुंची तो अधिकतर लोग घटनास्थल पर तो कुछ उन अस्पतालों में पहुंचे जहां घायलों को भर्ती करवाया गया था। अलग-अलग अस्पतालों में पोस्टमार्टम के बाद सोमवार दोपहर बाद मृतकों के शवों को गांव में लाया गया। पहले कलावती, मोनू व भतेरी के शव गांव पहुंचे, जिनका चुरू में ही पोस्टमार्टम हुआ था। उसके बाद रामनारायण का शव पहुंचा, जिसका सीकर में पोस्टमार्टम हुआ और बाद में सुनीता का शव पहुंचा। जैसे-जैसे शव वाहन मृतकों के घरों तक आए तो गांव में कोहराम मच गया। ग्रामीणों ने बड़ी मशक्कत से परिजनों को सांत्वना दी और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की।
एक परिवार के साथ जा रहे थे सब लोग
सोरड़ा गांव के रामकुमार के बेटे की शादी रूपलीसर गांव में की हुई है। उसकी ससुराल में किसी की मौत पर रामकुमार के परिवार के लोग मातमपुर्सी के लिए जा रहे थे। इसके अलावा उनके पड़ोसी रामनारायण महला व शेरसिंह झाझड़िया का परिवार भी उनके साथ था। हादसे में रामकुमार की पत्नी कलावती देवी (60), मोनू पुत्र सूरजभान (12) व भतेरी (60) पत्नी शेरसिंह झाझड़िया ने चुरू अस्पताल में दम तोड़ दिया वहीं रामनारायण महला (35) व सुनीता पत्नी सुरेंद्र (35) को जयपुर रेफर किया गया। रामनारायण ने जयपुर जाते समय सीकर में ही दम तोड़ दिया, जबकि सुनीता की जयपुर पहुंचने के बाद मौत हो गई।
इकलौता कमाने वाला था रामनारायण
सड़क हादसे में मारा गया रामनारायण अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला था। मां के अलावा पत्नी और दो बच्चों की आजीविका का रामनारायण ही खेवनहार था। ग्रामीणों ने बताया कि रामनारायण के पिता की भी करीब 20 वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। रामनारायण के परिवार में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है।
मां की मौत हुई, परिवार जिंदगी और मौत से जूझ रहा
अपनी ससुराल में मातम के लिए जा रहे राज कुमार को यह अहसास कहां था कि उसे ऐसे हादसे का शिकार होना पड़ेगा जो उसे हमेशा सालता रहेगा। हादसे में जहां राजकुमार ने अपनी मां को खो दिया वहीं खुद, उसकी पत्नी व दो बच्चे अभी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हादसे में मारी गई सुनीता का लड़का गांगुली भी गंभीर हालत में जयपुर में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा है। हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। वहीं, पिकअप का ड्राइवर बहल निवासी सत्यनारायण खटीक भी गंभीर रूप से घायल हुआ है पर उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।