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Bhiwani News: पहले मौसम की मार, अब सरकारी खरीद न होने से खुले में पड़ी बाजरे की फसल, किसान लाचार

Mon, 22 Sep 2025 01:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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अनाज मंडी में खुले में लगीं बाजरे की ढेरियां।
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भिवानी। पहले मौसम की मार और अब जिले के किसानों को बाजरे की सरकारी खरीद न होने के कारण गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर की अनाज मंडी में एक सप्ताह से बाजरे की फसल की आवक लगातार हो रही है लेकिन खरीद शुरू न होने से मंडियों में बाजरे की ढेरियां लगी हुई हैं। किसानों के लिए बनाए गए शेड में स्थानीय दुकानदारों ने अपना माल रख दिया है जिससे किसानों को अपनी फसल बाहर खुले में उतारनी पड़ रही है।
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इस बार जलभराव के कारण जिले में बाजरे की फसल के साथ अन्य फसलें भी खराब हो चुकी हैं। इसके चलते पहले से ही किसानों पर आर्थिक दबाव था। अब बची हुई बाजरे की फसलों की मंडियों में बेकद्री हो रही है। बाजरे की फसल की एमएसपी 2,750 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि मंडी में भाव 2,100 से 2,250 रुपये तक मिल रहे हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि बाजरे के भावांतर के लिए कम से कम 800 से 1,000 रुपये प्रति क्विंटल दिया जाए। पैसों की जरूरत के चलते किसान मजबूरी में एमएसपी से कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं। पिछले लगभग एक सप्ताह में शहर की अनाज मंडी में करीब 5,000 टन बाजरे की आवक हो चुकी है।

फसल बाहर खुले में उतारनी पड़ रही
अनाज मंडी में फसल डालने के लिए किसानों के लिए बनाए गए शेड में मंडी के दुकानदारों ने अपने खल, बिनौला और अन्य सामान रख दिया है। इसके कारण किसानों को फसल बाहर खुले में उतारनी पड़ रही है। खुले में फसल पशुओं और अन्य जीव-जंतुओं से खराब हो रही है। साथ ही मौसम में बदलाव और पंद्रह दिनों से लगातार तेज धूप के कारण किसान पसीने से तर-बतर हो रहे हैं और उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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बाजरे की फसल की सरकारी खरीद अभी शुरू नहीं हुई है। फसल पककर तैयार हो चुकी है और अगली फसल की बुआई से पहले खेतों से निकालना जरूरी है। मंडियों में एमएसपी मूल्य पर बिक्री न होने के कारण किसानों को कम दामों पर फसल बेचनी पड़ रही है जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हमारी मांग है कि जल्द से जल्द बाजरे की सरकारी खरीद शुरू की जाए। -सतबीर, किसान, कुसुंभी


इस बार अधिक बारिश के कारण ज्यादातर फसलें खराब हो चुकी हैं। बची हुई फसल का मंडियों में उचित भाव नहीं मिल रहा है। हमें भावांतर मूल्य 800 से 1,000 रुपये तक दिया जाए, ताकि हुए नुकसान की पूर्ति हो सके। साथ ही शेड में जगह न होने के कारण फसल खुले में उतारनी पड़ रही है। -पवन शर्मा, किसान, कुसुंभी


बाजरे की सरकारी खरीद के लिए अभी कोई पत्र नहीं आया है। खरीद का पत्र एचडब्ल्यूसी के पास आता है। शेड में रखे गए दुकानदारों के सामान को दो दिन में हटवा दिया जाएगा और किसानों को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। - योगेश, सुपरवाइजर, अनाज मंडी, भिवानी
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