भिवानी। ठंड के मौसम में भी 700 गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे सिर्फ एक तिरपाल की आड़ में अपना बसेरा बनाकर रहने को मजबूर हैं। ये वे परिवार हैं, जिन्होंने खुद का घर बनाने के लिए प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत आवेदन किया था, इनकी राशि भी सरकार से मंजूर हो गई, मगर सपनों का घरौंदा अभी तक तैयार नहीं हुआ। भिवानी शहर में 1500 गरीब परिवारों की पीएमएवाई के मकान बनाने की फाइलें सरकारी कार्यालय में पहुंची, जिन पर 1200 गरीब परिवारों ने अपने पुराने आशियाने भी ढहा दिए और नई उम्मीद का घरौंदा तैयार करने की बुनियाद भी खड़ी की, मगर उनकी आस छत तक नहीं पहुंची। सितंबर माह से ही पीएमएवाई आवास योजना का बजट खत्म हो चुका है, ऐसे में गरीब परिवार सिर पर छत बनाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा है कि अब वे जाए तो कहां जाएं।
भिवानी शहर के 31 वार्डों में 3811 गरीब परिवारों को लाभार्थी की सूची में शामिल किया गया है। इनमें से करीब 1500 पात्र परिवारों ने घर बनाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में आवेदन किए हुए हैं। इनमें से 1200 पात्र परिवारों के पीएमएवाई आवास अभी अधूरे पड़े हैं। जिनमें से किसी को पहली तो किसी को आखिरी किस्त के भुगतान का इंतजार बना हुआ है। करीब 700 गरीब परिवार तो ऐसे हैं, जिनके नए मकान की नींव भरी है, मगर सिर पर छत नहीं होने के कारण तिरपाल तानकर ठंड से पूरे परिवार का बचाव करने का प्रयास कर रहे हैं। इन घरों में बीमार, लाचार और बच्चे भी हैं। जिनकी मजबूरी और लाचारी शायद कोई नहीं समझ रहा है।
20 करोड़ का बजट हो चुका जारी, दूर नहीं हुई लाचारी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार पीएमएवाई में अब तक 20 करोड़ का बजट लाभार्थियों को जारी हो चुका है। मगर इसके बावजूद भी अधिकतर गरीब परिवारों की लाचारी दूर नहीं हुई। कुछ परिवारों ने तो पिछले दो साल से अपने आवेदन जमा करा रखे हैं, मगर उन्हें किस्त भुगतान के नाम पर अभी एक पैसा तक नहीं मिला है। सबसे अहम बात तो यह कि उन्हें पुराना मकान तोड़ने के भी आदेश दिए गए, मगर नए मकान निर्माण के लिए न तो किस्त मिली और न ही कोई आश्वासन मिला है।
दो साल से बिस्तर पर लाचार पड़ा हूं, तिरपाल ही ठंड से बचाव का सहारा
पिछले दो साल से बिस्तर पर हूं, मेरे घर पर छत नहीं है। तिरपाल के नीचे ठंड में छह सदस्यों का पूरा परिवार गुजर बसर करने पर मजबूर हैं। मुझे अधरंग(पैरालिसिस) है। मैं अपने परिवार के लिए न तो कमा सकता हूं न किस्त भुगतान कराने के लिए दफ्तर के चक्कर लगा सकता हूं, बस बिस्तर पर पड़ा अपनी बेबसी पर आंसू बहा रहा हूं। मेरा नाम पीएमएवाई की सूची में शामिल है। पहले जो खंडहर मकान था वह भी अधिकारियों ने दबाव देकर तुड़वा दिया, अभी तक कोई किस्त नहीं मिली है।
-राकेश, बावड़ीगेट क्षेत्रवासी।
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मकान की दो किस्त तो मिल चुकी हैं, मगर आखिरी किस्त के लिए तीन माह से चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारी बोल रहे हैं कि पहले मकान को रंग पेंट कराओ, फिर पैसे मिलेंगे। अब गरीब आदमी कहां से रंग पेंट के पैसे लाएगा। जो किस्त मिली थी, उमसें मकान का अधिकतर काम भी पूरा नहीं हुआ। अब अधूरे पड़े मकान में न फर्श बने हैं, न ठीक से रहने का कोई प्रबंध हुआ है।
-कमलेश, बावड़ीगेट क्षेत्रवासी।
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वर्जन:::
पीएमएवाई का सितंबर माह से बजट खत्म हो चुका है। जैसे ही बजट आएगा, तुरंत बकाया किस्तें जारी की जाएंगी। हमारे कार्यालय की तरफ से पीएमएवाई आवास योजना में किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं हैं, जिन लोगों ने आवेदन किए हैं, उन्हें लगातार किस्तें जारी की जा रही हैं, अब बजट नहीं है तो दिक्कत आ रही है।
-आनंद शर्मा, जेई, पीएमएवाई आवास योजना, अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय भिवानी।