गांव दिनोद में आयोजित सत्संग में प्रवचन देते संत कंवर महाराज।
भिवानी। भारतीय संस्कृति में व्रत-त्योहार आत्मचिंतन, प्रेम और समर्पण की प्रेरणा देते हैं। करवा चौथ भी परमात्मा के प्रति विश्वास और दांपत्य जीवन में निष्ठा का संदेश देता है। यह सत्संग वचन वीरवार को दिनोद गांव में संत कंवर महाराज ने संगत के बीच कहे।
संत कंवर महाराज ने कहा कि व्रत-त्योहार भले ही निर्धारित तिथियों पर मनाए जाते हैं लेकिन इनके पीछे श्रद्धा, प्रेम और विश्वास का भाव हमेशा बना रहता है। परमात्मा ही जीवन का आधार है और हर पल हमारा सहारा बनता है। इसलिए उसे केवल दुख या संकट में ही नहीं, बल्कि सुख के समय भी याद करना चाहिए और उसकी कृपा के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें परिस्थितियां बदलने पर भी विश्वास कायम रहे। व्रत-त्योहार रिश्तों की अहमियत समझने और जीवन में प्रेम, त्याग व सद्भाव अपनाने की प्रेरणा देते हैं। यदि व्यवहार में दया, विनम्रता और परोपकार नहीं है, तो केवल धार्मिक क्रियाओं से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
करवा चौथ की कथा में निष्ठा और विवेक का दिया संदेश
संत कंवर महाराज ने सुहागिनों को करवा चौथ की कथा सुनाते हुए कहा कि यह व्रत पति की दीर्घायु की कामना के साथ दांपत्य जीवन में अटूट विश्वास, प्रेम और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का प्रतीक है। प्रचलित कथा एक पतिव्रता स्त्री के दृढ़ संकल्प और प्रेम को दर्शाती है। इसका मूल संदेश है कि विश्वास के साथ विवेक, प्रेम के साथ धैर्य और समर्पण के साथ सत्य भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सुहागिनें पति की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं, उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में सद्कर्म, संयम और सेवा का संकल्प लेना चाहिए। परमात्मा के प्रति अटूट विश्वास रखते हुए भक्ति को केवल शब्दों और कर्मकांडों तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि उसे अपने विचारों और व्यवहार में भी उतारना चाहिए।