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खरीफ फसल की तैयारी कर रहे किसानों को नहीं मिल रही पर्याप्त बिजली

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रामनगर स्थित 132केवीं सब स्टेशन । संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। खरीफ सीजन की बिजाई में जुटे किसानों को गर्मी से नहीं, बल्कि सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने की वजह से पसीना आ रहा है। उनकी माथे की शिकन साफ जता रही है। किसान अब अगली फसल को लेकर खासे चिंतित हैं, क्योंकि भारी बिजली कटौती के बीच कृषि क्षेत्र में भी किसानों को मात्र दो घंटे बिजली मिल रही है।
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इसके लिए भी उन्हें रात-रात भर जागना पड़ता है, क्योंकि दिन में निगम ने कृषि क्षेत्र को बिजली आपूर्ति बंद कर दी है। इसकी वजह फसल कटाई बताई जा रही है। वहीं रात को बिजली देने का शेड्यूल बना हैं मगर शेड्यूल के हिसाब से भी उन्हें बिजली नहीं मिल रही है। हालांकि इस बार किसान बीटी कॉटन की बिजाई करने में जुटे हैं, क्योंकि देसी कपास के प्रति किसानों का रुझान नहीं है। अगर देसी कपास बिजाई में रुझान दिखाया तो प्रति एकड़ किसानों को तीन हजार रुपये का प्रोत्साहन भी मिलेगा।
भिवानी में इस बार करीब दो लाख एकड़ में बीटी कपास की बिजाई का अनुमान है, जिसकी शुरुआत हो चुकी है। 15 मई तक कपास की बिजाई होगी। पिछले साल करीब डेढ़ लाख एकड़ में कपास की बिजाई हुई थी। हालांकि बाजरा की बिजाई बारिश पर निर्भर है। अच्छी बारिश हुई तो किसान भी बाजरा बिजाई करेंगे। अभी जून और जुलाई में इसकी बिजाई होनी है, लेकिन कृषि विभाग को इस बार दो लाख एकड़ में बाजरा बिजाई की उम्मीद है। पेड़ी यानी चावल की खेती के लिए भी किसानों को पानी की जरूरत है मगर किसानों के खेत में लगे ट्यूबवेल शांत हैं। उन्हें चलाने के लिए बिजली की जरूरत है, जो नहीं मिल रही है। बिजली वितरण निगम ने कृषि क्षेत्र में बिजाई के दौरान किसानों को पांच घंटे बिजली देने का प्रावधान किया हुआ है। बिजली कटौती की वजह से मुश्किल से किसानों को किस्तों में दो घंटे बिजली मिल रही है।
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ये बोले किसान
गांव ढाणा लाडनपुर के किसान महेंद्र, मढांणा के किसान दयानंद, नीमड़ीवाली के राकेश ने बताया कि उन्हें इन दिनों ट्यूबवेल चलाने के लिए कम से कम सात से आठ घंटे बिजली चाहिए, लेकिन मात्र दो घंटे बिजली किस्तों में मिल रही है। इसकी वजह से एक बार खेत में पानी चलाते हैं तो भी पूरा खेत गीला नहीं हो पाता। नहरी पानी की कमी यहां पहले से ही है, ऐसे में ट्यूबेवल से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि ट्यूबवेल पर जो बिजली आ रही है, वह भी कई बार टू फेज या सिंगल फेज हो जाती है। इस पर ट्यूबवेल ही नहीं चल पाता है। सरकारी दावे तो किसानों के लिए हो रहे हैं मगर न नहरी पानी है न बिजली।
देसी कपास से किसान कर रहे तौबा
देसी कपास से किसान तौबा कर रहे हैं। इसके पीछे भी खास वजह है। किसानों को महंगी लेबर से देसी कपास की चुगाई करानी पड़ती है, जिस पर खर्च भी बढ़ जाता है और उत्पादन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिलता। बीटी कॉटन के अच्छे दाम तो मिल ही रहे हैं, उत्पादन भी देसी से कहीं ज्यादा आ रहा है। इसी को लेकर सरकार ने देसी कॉटन को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ तीन हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की योजना बनाई है।
देसी कपास पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
खरीफ सीजन में फिलहाल बीटी कॉटन बिजाई चल रही है। 25 अप्रैल से मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल खुल रहा है, जो किसान पोर्टल पर देसी कपास बिजाई का रजिस्ट्रेशन कराएगा, उसे तीन हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। ऐसा देसी कपास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कदम उठाया है। फिलहाल 15 मई तक कपास बिजाई किसानों द्वारा की जाएगी।
-डॉ. आत्माराम गोदारा, कृषि उपनिदेशक कृषि विभाग भिवानी।
थर्मल प्लांट बंद होने से बिजली की कमी
कृषि के लिए फिलहाल पांच घंटे बिजली देने का शेड्यूल है, यह बिजली रात के समय दी जा रही है। फसल कटाई चल रही है। इसलिए आग की घटनाओं से बचने के लिए दिन में बिजली नहीं दे रहे हैं। थर्मल प्लांट बंद होने से भी बिजली की कमी है। जिले में करीब 50 हजार से अधिक किसानों के ट्यूबवेल कनेक्शन हैं, जबकि दो हजार 70 नए ट्यूबवेल कनेक्शन देने की प्रक्रिया अभी चल रही है।
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-रणबीर सिंह, महाप्रबंधक, भिवानी सर्कल, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम।
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