भिवानी। किशोरी से छेड़छाड़ और अपहरण के मामले में आरोपी किसान नेता रवि आजाद की तरफ से शुक्रवार को न्यायालय में लगाई गई जमानत याचिका उनके अधिवक्ता ने तकनीकी वजह से वापस ले ली। रवि आजाद के वकील ने 24 दिसंबर को उनकी गिरफ्तारी के समय जमानत याचिका दायर की थी। पुलिस ने मामले में रवि आजाद को 24 दिसंबर को सिवानी पुलिस थाने में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा था।
एसआईटी टीम भी जमानत याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए अदालत पहुंची लेकिन उससे पहले ही आरोपी किसान नेता के वकील ने तकनीकी वजह से याचिका वापस ले ली। वहीं पीड़ित पक्ष के वकील रजत कल्सन ने बताया कि रवि आजाद पर पॉक्सो एक्ट, एससीएसटी एक्ट के अलावा मामले की जानकारी होने के बावजूद पुलिस तक न पहुंचाना और भीड़ जुटाकर मामले को दबाए जाने जैसी धाराएं लगी हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में जमानत याचिका स्पेशल कोर्ट में स्पेशल जज के समक्ष ही सुनवाई के लिए पेश की जाती है और लोहारू अदालत के ऐसे मामलों की सुनवाई भिवानी में बने स्पेशल कोर्ट में होती है।
एसआईटी की अध्यक्षता कर रहे डीएसपी आर्यन चौधरी ने कहा कि जमानत याचिका पर पुलिस अपना पक्ष रखने के लिए अदालत पहुंची थी लेकिन उससे पहले ही याचिका को वापस ले लिया गया।
ये था मामला:
बहल पुलिस थाने में 12 दिसंबर को क्षेत्र के एक गांव के व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी को करीब 15 से 20 दिन पहले बहल छोड़ने की बात कहकर गाड़ी चालक ने गाड़ी में बैठाया और रास्ते में छेड़छाड़ की। पीड़िता ने बताया कि गाड़ी चालक ने अपना नाम रवि आजाद बताया और खुद को बड़ा किसान नेता बताया। पीड़ित ने कहा कि घटना के बाद 10 दिसंबर को उसकी बेटी जब घर के बाड़े में थी तो रवि आजाद की गाड़ी में आए युवकों ने उसका अपहरण करने की कोशिश की। पुलिस ने 12 दिसंबर को रवि आजाद के खिलाफ एससीएसटी एक्ट, पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। रवि आजाद को 24 दिसंबर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया। मामले में तीन युवकों को भी 19 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।