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सिंचाई विभाग का पक्ष सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने किसान की याचिका खारिज की

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तोशाम क्षेत्र की माहु डिस्ट्रीब्यूटरी में पाइप लाइन डालने के विरोध में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने किसान की याचिका खारिज कर दी है। दरअसल, बुधवार को हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार की तरफ से सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शपथ पत्र दाखिल किया था, जिस पर सुनवाई और बहस हुई। इसके बाद न्यायालय ने किसान की याचिका को गैर वाजिब करार देते हुए खारिज कर दिया।
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बता दें कि तोशाम क्षेत्र की माहु डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पाइप लाइन डालने के विरोध में किसानों का एक धड़ा इसके खिलाफ खड़ा है। इसी मामले में किसानों का आंदोलन भी चल रहा है। गांव आलमपुर के किसान नरेश ने इसी मामले को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में एक याचिका डाली थी। जिसमें किसान नरेश ने यह बताया था कि माहु डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पाइप लाइन डालने के दौरान किसानों की खेतों में खड़ी फसल मशीनों की वजह से खराब हो जाएगी और काम चलने के दौरान किसानों को नहरी पानी बंद होने से सिंचाई का भी प्रबंध नहीं हो पाएगा। किसान नरेश ने इस मामले में हरियाणा सरकार और सिंचाई विभाग को पार्टी बनाया था। इस मामले में उच्च न्यायालय ने सिंचाई विभाग से जवाब तलब किया था। बुधवार को सुनवाई के दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शपथ पत्र के साथ अपना जवाब दाखिल कर दिया था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की दलील थी कि माहु डिस्ट्रीब्यूटरी नहर में पाइप डालने के दौरान किसानों की कोई फसल खराब नहीं होगी और पाइप लाइन डालने के कार्य की वजह से नहरी पानी के शेड्यूल भी प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इस जवाब के बाद बहस भी हुई और फिर न्यायालय ने किसान की मांग को गैर वाजिब करार देते हुए उसकी याचिका को ही खारिज कर दिया।
वर्जन-
आलमपुर के किसान नरेश कुमार की तरफ से हाई कोर्ट में एक केस डाला गया था, जिस पर स्टेटस को लगा हुआ था। बुधवार को उच्च न्यायालय में याचिका खारिज कर दी गई। जिसके बाद अब इस मामले में कानूनी अड़चन दूर हो गई है। अब माइनर में पाइप लाइन डालने का काम जल्द शुरू होगा। भिवानी जिले में 12 नहरी चैनलों में पाइप लाइन डाले जाने हैं, जिसमें एक चैनल का काम पूरा हो चुका है, जबकि एक चैनल पर काम चल रहा है। इसी तरह 10 चैनलों पर काम होना बाकी है।
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- दलीप सिंह चेरवाल, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग भिवानी
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