भिवानी जिले की मंडियों में सरसों की आवक की संभावना है।
भिवानी। सरकारी खरीद के लिए सोमवार से मंडियों में सरसों की आवक की संभावना है। हालांकि, अधिकारिक रूप से सरसों की सरकारी खरीद की घोषणा होने के नौ दिन बाद भी खरीद नहीं हो पाई है। इसकी वजह अधिकारी कम आवक बता रहे हैं। सोमवार को भी मंडी में सरसों लेकर आने वाले किसानों की मुश्किलें कम नहीं होंगी, क्योंकि अधिक नमी मिलने पर अधिकारी सरसों की सरकारी खरीद नहीं करेंगे।
ऐसे में किसानों को नमी की वजह से दो से तीन दिन और इंतजार करना पड़ सकता है। भिवानी की चारामंडी सहित जिले की 11 मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद की तैयारी की गई है। भिवानी जिला मुख्यालय की मंडी में हैंडलिंग एजेंटों को लेकर भी विवाद बना है। वहीं बवानीखेड़ा सोसायटी ने वेयर हाउस के माध्यम से नेफेड की खरीद के लिए दो बाहरी हैंडलिंग एजेंट बनाए हैं। इनके माध्यम से ही सरसों की सरकारी खरीद कराई जाएगी।
भिवानी मंडी में फिलहाल प्राइवेट बोली पर ही सरसों खरीद हो रही है। सरकार ने इस बार 5,950 रुपये प्रति क्विंटल सरसों की सरकारी खरीद पर एमएसपी निर्धारित किया है, जबकि मार्केट में फिलहाल 5,600 प्रति क्विंटल सरसों बिक रही है। आवक तेज होने के साथ ही प्राइवेट बोली का रेट और कम आने की संभावना है।
ऐसे में अधिकांश पंजीकृत किसानों का प्रयास रहेगा कि उनकी सरसों सरकारी एजेंसियां खरीद करा दें। किसानों के गेट पास और पानी का प्रबंध भी मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से कराया गया है। वहीं खरीद के साथ ही झराई, भराई और तुलाई की व्यवस्था इस बार दो हैंडलिंग एजेंटों के कंधों पर ही है। मंडियों में आवक तेज होने के साथ समय पर उठान नहीं होने की वजह से भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। क्योंकि अभी तक ढुलाई के टेंडर नहीं हो पाए हैं।
25 लाख क्विंटल सरसों की खरीद का रखा गया है लक्ष्य भिवानी जिले में करीब साढ़े तीन लाख एकड़ में सरसों की फसल की बिजाई हुई थी। ऐसे में भिवानी जिले में इस बार सरकारी एजेंसियों के माध्यम से किसानों से करीब 25.5 लाख क्विंटल सरसों की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। सरसों की सरकारी खरीद 15 मार्च से मंडियों में आरंभ हो चुकी है। लेकिन अभी मंडियों में सरसों की आवक कम है। इसकी वजह अधिकांश किसान सरसों की कटाई में जुटे हैं।
सरसों की सरकारी खरीद के लिए वेयर हाउस और हैफेड के अधिकारियों को मंडियां अलॉट कर ड्यूटी लगाई गई हैं। अधिकारी भी किसानों का आह्वान कर रहे हैं कि वे मंडी में आने से पहले अपनी सरसों की फसल को अच्छी तरह सूखाकर लाएं ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।