शीत लहर के कहर से हर कोई बेहाल हो उठा। भिवानी में भी शनिवार को पारा लुढ़ककर 3.8 डिग्री पहुंच गया। वहीं, अधिकतम तापमान भी 16.8 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 4.0 और अधिकतम तापमान 17.3 दर्ज किया गया था। तापमान गिरने व खेतों में पाला जमने से कंपकंपाती ठंड का कहर बना रहा और दिसंबर में सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया।
शनिवार को खेतों में तापमान में आई गिरावट की वजह से पाला जमा। वहीं, किसान अपनी सरसों की फसल को लेकर भी चिंतित दिखाई दिए। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि 30 दिसंबर तक सर्द हवाओं के साथ मौसम खुश्क बना रहेगा। जबकि 31 दिसंबर की देर रात के बाद गरज के साथ हल्की बारिश के भी आसार बने हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय फसलों के लिए भी मौसम बेरहम बना हुआ है। पाले से बचाव के लिए किसान फसलों में हल्की सिंचाई करें और रात के समय खेत में धुएं का भी प्रबंध करें, ताकि पाले का प्रभाव फसल पर ना पड़े। ग्रामीण क्षेत्र में भी शनिवार का दिन सबसे ठंडा रहा। शीत लहर से बचाव के लिए लोग दिनभर अलाव का सहारा लेते नजर आए। दिनभर सड़कों पर भी सन्नाटा पसरा रहा।
ये बोले लोग
राजेंद्र जैन तोशामिया का कहना है कि ठंड ने हालत काफी खराब कर दी है। कड़ाके की इस ठंड ने तो कई सालों के रिकार्ड तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि काम की बजाए ठंड से बचने के उपाय को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। सोमवीर नेहरा, बंटी महता, बलवान सिंह, अनिल गर्ग ने कहा कि आए साल अब ठंड अपने पिछले रिकार्ड तोड़ रही है। जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित है।
ये दी विशेषज्ञों ने सलाह
डॉ. प्रोमिला शर्मा ने बताया कि ठंड से बचाव बेहद जरूरी है। हृदय, शुगर, सांस रोग से पीड़ित बुजुर्ग व बच्चों को अचानक गर्म से ठंड वाले स्थान पर नहीं जाना चाहिए। बिस्तर से निकलने के पश्चात कुछ देर बाद ही कमरे से बाहर जाएं। गर्म एवं ऊनी कपड़े पहनें और घूमने से परहेज करें।