लोहारू शहर में मुख्य सड़क पर छाया स्मॉग।
लोहारू। दिवाली के त्योहार के बाद से लोहारू इलाके में स्मॉग का प्रभाव कम होने का नाम नही ले रहा है। शाम ढलते ही शहर की स्ट्रीट लाइटें स्मॉग के आगे फीकी पड़ जाती है। स्मॉग के प्रभाव को देखते हुए चिकित्सकों ने सांस के रोगियों और बच्चों को सुबह व शाम के समय टहलने से बचने या फिर टहलते समय मास्क का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
दीपावली से पहले पूरे प्रदेश में पराली जलाने के मामले सामने आने और दीपावली पर आतिशबाजी के बाद आसमान में स्मॉग का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके कारण वातावरण में भी जहरीले कणों की मात्रा बढ़ जाती है और पर्यावरण प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है। सामान्य लोगों को भी इस प्रदूषण के कारण आंखों में जलन, सांस में तकलीफ बढ़ जाती है। सुबह और शाम के समय वातावरण में स्मॉग का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा सकता है।
लोगों का कहना है कि स्मॉग के कारण आंखों में जलन और हाथों पर खाज खुजली की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में चिकित्सकों ने भी लोगों को पर्यावरण प्रदूषण से बचने और सुबह-शाम टहलते समय आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
मौसम परिवर्तन के साथ इन दिनों वायरल के केस अधिक हैं। फिर भी वातावरण में स्मॉग की मात्रा को देखते हुए सांस के रोगियों आवश्यक एहतियात बरतनी चाहिए। अनावश्यक बाहर घूमने से बचना चाहिए। आंखों में जलन या किसी प्रकार की दिक्कत होने पर सरकारी अस्पताल में चिकित्सकों को दिखा सकते हैं।
- डॉ. गौरव चतुर्वेदी, एसएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहारू।
स्मॉग बढ़ने के कारण सांस के रोगियों को सांस लेने में तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे में सांस के रोगियों और बच्चों को सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह और शाम टहलने से बचना चाहिए। घर से बाहर जाते समय मास्क का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। आंखों में जलन होने पर आंखों को साफ पानी से धोएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सक को अवश्य दिखाएं।
- डॉ. पुनीत सिंगला।