कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई अब ‘अ’, ‘आ’ या फिर ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ से नहीं होगी। बल्कि बच्चे सीधा कहानी पढ़कर अक्षर ज्ञान प्राप्त करेंगे। विद्यार्थियों को खुद प्रायोगिक आधार पर सीखने के लिए प्राइमरी स्कूलों में लर्न बाइ डूइंग पद्धति अपनाई जाएगी। इसके लिए जिले के सभी प्राइमरी स्कूल शिक्षकों को ट्रेनिंग के जरिए बच्चों को पढ़ाने, उनके ज्ञानवर्धन को बढ़ाने आदि की ट्रेनिंग दी जा रही है।
जिले के सभी दस खंडों में चार मास्टर ट्रेनर कक्षा पहली से पांचवीं तक के शिक्षकों को अलग-अलग वर्गों में प्रशिक्षण दे रहे हैं। अगस्त माह तक चलने वाले प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक अपने स्तर पर योजना को फलीभूत करने के प्रयास करेंगे। भिवानी ब्लॉक में बीईओ कार्यालय व गवर्नमेंट स्कूल में शिक्षकों की ट्रेनिंग चल रही है। अधिगम संवर्धन कार्यक्रम के तहत मास्टर ट्रेनर योगेश, राकेश कुमारी, सोनिया शर्मा व प्रीति खंड के 138 शिक्षकों को किताबों, व्यवहारिक, प्रायोगिक ज्ञान से प्रशिक्षित कर रहे हैं। प्रशिक्षण शिविर के असिस्टेंट प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर विरेंद्र पूनिया ने बताया कि विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा ज्ञान कराने, प्रायोगिक ज्ञान देकर जल्द समझाने आदि फायदों के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण मिलने के बाद शिक्षक स्कूलों में अपना काम करेंगे।
मास्टर ट्रेनरों को तीन दिन की ट्रेनिंग
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को ट्रेनिंग दे रहे मास्टर ट्रेनरों को खुद एससीईआरटी की ओर से गुड़गांव में तीन दिन का प्रशिक्षण दिया गया। राज्य शैक्षणिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) कक्षा पहली से पांचवी तक के मास्टर ट्रेनरों को अलग-अलग समय पर ट्रेनिंग दिया जा रहा है। उसके बाद सभी जिला स्तर पर अन्य प्राइमरी स्कूल शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जा रही है।