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Bhiwani News: बारिश में बढ़ा कान का फंगल संक्रमण, खुजली पर माचिस की तीली डालना पड़ सकता है भारी

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शहर के मेडिकल कॉलेज में लगी मरीजों की भीड़। 
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भिवानी। बारिश के दिनों में कान में पानी और नमी जमा होने से फंगल संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में कान के फंगल संक्रमण ऑटोमाइकोसिस से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कान में खुजली या भारीपन होने पर माचिस की तीली, हेयर पिन, सेफ्टी पिन या कॉटन बड्स डालना संक्रमण को और गंभीर कर सकता है।
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इससे कान की नाजुक त्वचा को चोट पहुंचने के साथ कान के पर्दे को नुकसान का खतरा भी रहता है। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभम महता ने बताया कि ऑटोमाइकोसिस कान की बाहरी नली में होने वाला फंगल संक्रमण है। बारिश में नहाने, तैराकी करने या नमी वाले वातावरण में रहने के दौरान कान के अंदर पानी चला जाए और सूख न पाए तो वहां फंगस पनपने लगता है।
कान में मौजूद वैक्स त्वचा को प्राकृतिक सुरक्षा देता है। ऐसे में कान में पानी जमा रहने या बार-बार सफाई के दौरान वैक्स निकाल देने से संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
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ऑटोमाइकोसिस होने पर सबसे पहले कान में खुजली और भारीपन महसूस हो सकता है। इसके साथ दर्द और सूजन भी हो सकती है। कान बंद होने या उसमें दबाव जैसा महसूस होने के अलावा सफेद, पीले या भूरे रंग का बदबूदार तरल पदार्थ भी निकल सकता है। कान में लालिमा और सीटी बजने जैसी आवाज महसूस होना भी इसके लक्षणों में शामिल है।

खुजली हुई तो कान में कुछ डालने की गलती न करें
डॉ. महता ने बताया कि कान में खुजली या भारीपन होने पर लोग अक्सर माचिस की तीली, हेयर पिन, सेफ्टी पिन या कॉटन बड्स से कान साफ करने लगते हैं। यही गलती संक्रमण को बढ़ा सकती है। नुकीली वस्तु कान की नाजुक त्वचा को छील देती है जिससे फंगस को फैलने के लिए अनुकूल जगह मिल जाती है। कॉटन बड्स भी सुरक्षित विकल्प नहीं हैं। इनके इस्तेमाल से फंगस और गंदगी कान के पर्दे के और करीब पहुंच सकती है। इससे कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने और उसके फटने तक का खतरा रहता है।

कान में पानी गया तो ऐसे करें बचाव
डॉ. महता ने बताया कि कान को सूखा रखना ऑटोमाइकोसिस से बचाव का सबसे आसान तरीका है। नहाने या तैराकी के बाद कानों को सूखे तौलिए से हल्के हाथ से पोंछें। सिर को एक तरफ झुकाकर कान में गया पानी बाहर निकालें। कान में कॉटन बड्स, पिन या उंगली डालकर सफाई न करें। उन्होंने कहा कि कान में दर्द या खुजली होने पर खुद से कोई ड्रॉप या तेल डालने से भी बचना चाहिए। लक्षण दिखाई देने पर ईएनटी चिकित्सक से जांच करानी चाहिए ताकि संक्रमण की सही वजह का पता लगाकर उचित उपचार किया जा सके।
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