महम गेट स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। अस्पताल में करीब चार घंटे परिजनों ने हंगामा किया और चिकित्सक पर लापरवाही के आरोप लगाए। हंगामे के बीच शहर के अनेक नामी प्राइवेट चिकित्सक, विधायक घनश्याम सर्राफ व अन्य गणमान्य लोग पहुंचे। घंटों के प्रयास के बाद दोनों पक्षों में समझौता कराया गया।
लोहड़ बाजार वासी एक व्यक्ति की पत्नी को डिलीवरी के लिए मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे महम गेट चौक स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया। चिकित्सक ने जांच के बाद उसे घर भेज दिया। सायं करीब साढे़ सात बजे अधिक तकलीफ होने पर महिला को दोबारा अस्पताल ले जाया गया। रात करीब 12 बजे महिला की डिलीवरी हुई और डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कोर्ट केस करने, पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाने की धमकी दी। हंगामे की सूचना शहर के अनेक प्राइवेट अस्पतालों के चिकित्सक भी उक्त अस्पताल पहुंचे। पीड़ित पक्ष ने विधायक घनश्याम सर्राफ को भी बुलाया। रात करीब डेढ़ बजे से सुबह करीब छह बजे तक हंगामा चला।
बाद में चिकित्सकों व अन्य गणमान्य लोगों की सहायता से मामला सुलझाया गया। चिकित्सक ने बताया कि महिला की जांच के बाद परिजनों को बता दिया गया था कि ऑपरेशन करना होगा। मगर परिजन सामान्य डिलीवरी करने और इंतजार की बात कहते है। दो-तीन दफा ऑपरेशन के लिए परिजनों को कहा गया। परिजनों के सामान्य डिलीवरी के इंतजार में ही मरीज की हालत बिगड़ी और बच्चे की डिलीवरी के दौरान मौत हुई। वहीं परिजनों का आरोप है कि उन्हें बिना बताए अनेक कागजात पर हस्ताक्षर करवा लिए गए। महिला की सही स्थिति भी उन्हें नहीं बताई गई।
लंबे इंतजार के बाद खुशी का था इंतजार
महिला को शादी के तीन-चार साल बाद भी बच्चा नहीं हो रहा था। परिजनों के अनेक जगह दवा दिलाने के बाद महिला गर्भवती हुई। पूरे परिवार को बच्चे के आने की खुशी का इंतजार था। पूरे घर में खुशी का माहौल था। सभी बस बच्चे के घर आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही चिकित्सकों ने डिलीवरी के दौरान बच्चे की मौत की सूचना दी। सारी खुशियां मातम में बदल गई। इसी कारण परिजनों का गुस्सा भी फूट पड़ा और अस्पताल में हंगामा किया।