सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में चार घंटे शुगर की मरीज वृद्धा तड़पती रही मगर किसी चिकित्सक ने उसे नहीं संभाला। महिला को पीजीआई रेफर करने वाला भी कोई नहीं था। आखिरकार ऑपरेशन ड्यूटी से चिकित्सक आया और महिला को पीजीआई रोहतक के लिए रेफर किया।
महिला को परिजन एंबुलेंस से लेकर महम गेट चौक तक ही पहुंचे थे कि महिला ने दम तोड़ दिया। परिजनों ने मामले में किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करवाते हुए शव अपने साथ ले गए।
ब्रह्मा कॉलोनी वासी करीब 58 वर्षीय महिला कमला देवी को शुगर की बीमारी थी। शुगर अधिक बढ़ जाने के कारण परिजन उसे प्राइवेट अस्पताल लेकर गए। जहां से दो दिन पहले सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इमरजेंसी में महिला का इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह महिला की हालत अधिक गंभीर हुई तो उसे परिजनाें ने पीजीआई रोहतक रेफर करने की बात कही।
दोपहर करीब 12 बजे महिला की हालत अधिक गंभीर हुई तो परिजनों ने पीजीआई ले जाने के लिए ट्रिटमेंट स्लिप पर रेफर संबंधी हस्ताक्षर कराने के लिए चिकित्सकों से संपर्क साधने का प्रयास किया।
मृतका के भांजे रूपेश ने बताया कि वे 12 बजे से चार बजे तक चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे ताकि रेफर करने के लिए पर्ची पर हस्ताक्षर हो।
सायं चार बजे एक चिकित्सक आए और उन्होंने स्लिप पर रेफर किया। जब वे पीजीआई ले जा रहे थे तो महम गेट पर ही उसकी मौसी ने दम तोड़ दिया। चिकित्सक अगर समय पर रेफर कर देते और समय पर पीजीआई पहुंच जाते तो उसकी मौसी बच सकती थी।
इवनिंग शिफ्ट में चिकित्सक ही नहीं आया
सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में 24 घंटे डाक्टर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मगर दोपहर दो से आठ की शिफ्ट में जिस चिकित्सक की ड्यूटी थी वह नहीं आए। जिस कारण घंटों इमरजेंसी बिना चिकित्सक के चली और मरीज परेशान रहे। दोपहर बाद ऑपरेशन ड्यूटी से आरएमओ डॉ. सतवीर धनखड़ इमरजेंसी पहुंचे और आठ बजे तक ड्यूटी दी