गांव संडवा के खेल स्टेडियम में बने पीने के पानी के कुंड के साथ मौजूद ग्रामीण।
तोशाम। कर्नल बलवान सिंह कालीरामण ने अपने दिवंगत भाई शेरसिंह की स्मृति में गांव संडवा के खेल स्टेडियम में पीने के पानी के लिए कुंड का निर्माण करवाया है। शेरसिंह ने करीब 40 वर्षों तक दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने जीवन भर फैक्ट्रियों की ऊंची दीवारों में दबे श्रमिकों की आवाज को मंच प्रदान किया।
शेरसिंह 70 के दशक में आईआईटी कानपुर, आईआईटी मद्रास और जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भाभा अनुसंधान केंद्र से चार हजार रुपये की स्कॉलरशिप भी हासिल कर चुके थे। उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरी के बेहतर विकल्प होते हुए भी उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से मजदूरों के हितों को समर्पित कर दिया। वे मजदूर समाचार और संघर्ष जैसे पत्रों से भी जुड़े रहे।
गत 25 जनवरी को उनका निधन हो गया था। उनकी स्मृति में बनाए गए पेयजल कुंड का उद्घाटन रविवार को उनके बचपन के साथियों मास्टर चंद्रभान बलौदा और कैप्टन नौरंग कालीरामण ने किया। इस मौके पर वक्ताओं ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तित्व बिरले ही जन्म लेते हैं, जिन्होंने निजी स्वार्थों से ऊपर उठकर जनसेवा को प्राथमिकता दी। कार्यक्रम में सरपंच कृष्ण कुमार जांगड़ा, अखिल भारतीय कालीरामण खाप के पूर्व राष्ट्रीय प्रधान वीरेंद्र संडवा, मास्टर रघुबीर बलौदा, सज्जन संडवा, सुखबीर प्रधान और रामपाल कालीरामण सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
शेरसिंह ने मजदूर आंदोलन के हर मंच को मजबूती दी। वे चाहते तो आरामदायक जीवन चुन सकते थे लेकिन उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना। उनके स्मरण में यह पेयजल कुंड समर्पित है। - कर्नल बलवान सिंह कालीरामण