भिवानी। डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों के सामने व्यवहारिक चुनौतियां आ रही हैं। धान के खेतों में ढाई फीट तक पानी जमा होने और बाजरे की ऊंची फसल के बीच पहुंचकर मोबाइल एप से सर्वे करना मुश्किल है। वहीं एक मोबाइल से दिनभर में करीब 15 से 20 सर्वे ही हो पाने से पटवारियों के अन्य राजस्व कार्य प्रभावित होने की बात सामने आई है।
पटवारियों और कानूनगो की 20 अगस्त से जारी हड़ताल के दौरान पटवारियों ने राजस्व अधिकारियों के साथ खेतों में जाकर डिजिटल क्रॉप सर्वे में सहयोग किया। हालांकि सोमवार से लघु सचिवालय के बाहर फिर से पटवारियों और कानूनगो का धरना शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को तहसीलदार जयवीर सिंह ने गांव बड़ेसरा के खेतों में पहुंचकर डिजिटल सर्वे की व्यवहारिक स्थिति जांची।
इस दौरान उनके सामने भी कई चुनौतियां आईं। इलाके में कुछ किसानों ने धान की रोपाई की है और उनके खेतों में ढाई फीट तक पानी जमा था। ऐसे में खेत के अंदर तक पहुंचकर डिजिटल सर्वे करना संभव नहीं हो पाया। कई खेतों में बरसाती पानी के कारण जलभराव है जिससे फसल खराब हो रही है। पानी लंबे समय से जमा होने के कारण खेतों में दलदल बन गई है और पांव रखते ही जमीन में धंस रहे हैं।
खेतों में उतरना जोखिम भरा, एक मोबाइल से 15-20 सर्वे ही संभव
धान के खेतों में पानी भरा होने के कारण अंदर तक पहुंचना मुश्किल है जबकि बाजरे के खेतों में फसल की ऊंचाई अधिक होने से अंदर जाने पर जहरीले जीवों का खतरा बना रहता है। सर्वे के लिए इस्तेमाल होने वाले मोबाइल पर लोगों और अधिकारियों के लगातार फोन आने से भी काम प्रभावित हो रहा है। एक मोबाइल से दिनभर में करीब 15 से 20 सर्वे ही किए जा सकते हैं। ऐसे में पटवारियों के भूमि संबंधी अन्य काम भी प्रभावित होंगे।
पटवारी कानूनगो एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास राठी ने बताया कि राजस्व विभाग के अधिकारी भी डिजिटल क्रॉप सर्वे को व्यवहारिक तौर पर चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के पास संसाधन उपलब्ध हैं लेकिन पटवारी जरूरी संसाधनों के बिना खेतों में यह काम समय पर कैसे पूरा कर पाएंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
विकास राठी ने बताया कि एक गांव में हजारों एकड़ क्षेत्र होता है। पूरे दिन खेतों में रहने के बावजूद एक पटवारी अधिकतम करीब 20 सर्वे ही कर पाएगा। सरकार ने सर्वे के लिए 45 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। कई गांवों का क्षेत्रफल 10 हजार एकड़ से अधिक है और प्रत्येक फसल का डिजिटल सर्वे किया जाना है, ताकि सरकारी रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जा सके। उनके अनुसार इतनी कम समय सीमा में यह काम पूरा करना संभव नहीं है इसलिए पटवारियों और कानूनगो का विरोध जारी है।