भिवानी। नकली चोट, असली केस मामले में दो चिकित्सकों को दो-दो साल कैद और चार हजार रुपये जुर्माना किया गया है। यह फैसला न्यायाधीश कुमारी ज्योति की अदालत ने सुनाया। दोनों में एक चिकित्सक सेवानिवृत्त हो चुका है।
मामला नवंबर 2010 का है। भिवानी सामान्य अस्पताल में उस समय तैनात रहे डॉ. आरपी शर्मा और डॉ. दारा सिंह के खिलाफ लिपिक प्रहलाद सिंह ने शिकायत की थी। अभियोग के अनुसार प्रहलाद सिंह लिपिक सामान्य अस्पताल भिवानी में कार्यरत थे। उस समय डॉ. दारा सिंह चिकित्सा अधिकारी के साथ अच्छी दोस्ती थी। वर्ष 2004 में हुडा गुड़गांव के प्लाट के लिए संयुक्त रूप से आधी-आधी पूंजी लगाकर डॉ. दारा सिंह के नाम से प्लाट के लिए आवेदन कर दिया। यह प्लाट डॉ. दारा सिंह के नाम से ड्रा हो गया। कुछ समय बाद दोनों में विवाद हो गया। इसी बीच प्रहलाद सिंह का हिसार सामान्य अस्पताल में ट्रांसफर हो गया। डॉ. आरपी शर्मा और एक अन्य के साथ मिलकर फर्जी मेडिकल के सहारे प्रहलाद सिंह के खिलाफ पुलिस केस दर्ज करवा दिया। जिसके बाद प्रहलाद सिंह ने हाईकोर्ट से जमानत करवाई। अब मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने मामले में दो चिकित्सकों को दोषी करार दिया और दो-दो वर्ष कैद और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। डॉ. दारा सिंह फिलहाल कुंड़ली में तैनात है जबकि एसएमओ डॉ. आरपी शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके है। मामले में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जांगड़ा ने बताया कि मामले में डॉ. आरपी शर्मा और डॉ. दारा सिंह को दो-दो वर्ष की सजा सुनाई गई है और कुछ जुर्माना किया गया है।
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