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धमकियों से परेशान युवक ने लगाई फांसी

Sat, 17 Sep 2016 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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suicide
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पंचायती चुनाव के बाद उपजी रंजिश में लगातार मिल रही धमकियों से परेशान युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक ने दो पर चुनावी रंजिश के बाद जान से मारने की धमकी देने, तंग करने का आरोप लगाया। इस मामले में 14 जुलाई को भी झगड़ा हुआ था। पुलिस ने शिकायत पर दो के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया है।
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मामला केहरपुर गांव का है। दोपहर करीब 12 बजे 23 वर्षीय युवक प्रवीण का शव उसके घर में ही चौबारे पर बने कमरे में पंखे से लटकता मिला। परिजनों ने देखा तो उसकी धड़कने चल रही थी। वे तुरंत उसे उपचार के लिए जूई गांव के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद शव को सामान्य अस्पताल लाया गया। सूचना पर जूई चौकी पुलिस भी मौके पर पहुंची। मृतक की जेब से चार पेज का एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने आरोप लगाया कि चुनावी रंजिश के कारण कुछ लोग उसे जान से मारने की धमकियां दे रहे थे। घर से बाहर निकलते ही उसे धमकी दी जाती थी। किसी और के हाथ से मरने से अच्छा है कि वह खुद ही सुसाइड कर ले।
प्रवीण के चाचा भागीरथ ने बताया कि चुनावी रंजिश के कारण रिश्तेदारों से उनकी बोलचाल बंद करवा दी गई। उनसे दो-तीन दफा मारपीट की गई। मामले में जूई चौकी से इंचार्ज एसआई सतपाल सिंह ने बताया कि युवक के पास से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसके आधार पर परिजनों की शिकायत पर दो युवकों हरीश व विरेंद्र उर्फ नानड के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज किया है।
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कानून से मांगा न्याय, परिजनों से मांगी माफी
सुसाइड नोट में प्रवीण ने लिखा कि चुनावी रंजिश के कारण उसके पड़ोस में रहने वाला हरीश सामने आते ही उसे धमकी देता है कि विरेंद्र नानड का फोन आया है कि कालिया को बोल देना अभी तो देखा ही क्या है। जान से मारेंगे। मैं नहीं चाहता किसी और के हाथ से मरु। इसलिए खुद ही अपने आपको को विरेंद्र के डर से खत्म कर देना चाहता हूं। पुलिस व कानून से आत्मा की शांति के लिए न्याय दिलाये। प्रवीण ने सुसाइड नोट में अपने परिवार वालों, बहनों से माफी मांगी। साथ ही रिश्तेदारों से पत्नी और मां-बाप को हौसला बढ़ाने की अपील की।

पहले उम्मीदवार खड़ा किया और फिर खुद चुनाव लड़ने लगा
मामले में मृतक के चाचा भागीरथ ने बताया कि चुनाव में उसके चाचा पूर्व सरपंच ने परिवार के ही एक अन्य युवक को उम्मीदवार बनाया और हम सबको उसे वोट देने के लिए कहा। बाद में स्वयं भी चुनाव में खड़ा हुआ। पहले वाले को भी नहीं बैठाया। उन्होंने दूसरे को वोट दिए तो उन्हें तंग किया जाने लगा। मारपीट की गई और रिश्तेदारों से बोलचाल बंद कर दी गई।
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