अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
सरसों के कट्टों में बाजरा और गेहूं की मिलावट कर सरकार को लाखों का चूना लगाने का मामला सामने आया है। मिलावट सामने आने के बाद नैफेड ने एक सौ कट्टों को वापस हैफेड भिवानी के पास भिजवा दिए हैं। इसके अलावा निर्धारित से अधिक नमी बताकर भी सरसों के 175 कट्टे वापस भेजा दिए हैं। डीसी के संज्ञान में मामला आने के बाद सैंपलिंग करवाई गई और सील सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। मिलावट के आरोप हैफेड अधिकारियों और आढ़तियों पर लगाए जा रहे हैं। वहीं ढुलाई ठेकेदारों ने डीएम कार्यालय में हंगामा कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
सरसों की सरकारी खरीद हैफेड के माध्यम से की गई थी। हैफेड ने खरीद के बाद सरसों के कट्टे नैफेड के वेयर हाउस हिसार और फतेहाबाद भेजे। अब सरसों के कट्टों में मिलावट बताकर नैफेड ने करीब सरसों के 100 कट्टे शुक्रवार दोपहर को वापस भिवानी हैफेड के पास भेज दिए। कुछ समय बाद 175 कट्टों से भरा एक और ट्रक पहुंचा लेकिन इसमें निर्धारित से अधिक नमी बताई गई। सरसों के कट्टे इस तरह वापस लौटने पर हड़कंप मच गया।
इसको लेकर ढुलाई ठेकेदारों ने हैफेड डीएम कार्यालय में हंगामा किया और अधिकारियों, आढ़तियों पर मिलावटखोरी के आरोप लगाकर सरकार को चूना लगाने की बात कही। ठेकेदारों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच करा दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की। ठेकेदारों ने डीसी को भी शिकायत की। इसके बाद डीसी ने तहसीलदार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर चारा मंडी जांच के लिए भेजा। सीटीएम महेश कुमार भी पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में वापस लौटाए गए सरसों के कट्टों से सैंपल सील किए गए जिन्हें जांच के लिए लैब में भेजा जाएगा।
मिलाव कर चार हजार में बेचा जा रहा 1300 रुपये प्रति क्विंटल का बाजरा
मिलावटखोरी में सामने आया है कि चार हजार रुपये प्रति क्विंटल की सरसों में 1300 रुपये क्विंटल वाले बाजरे की मिलावट की जा रही है। यानी मिलावटखोरी कर 1300 रुपये प्रति क्विंटल वाले बाजरे को सरसों के दाम में बेचा गया। दानों का साइज लगभग एक समान होने के कारण ये खेल पकड़ में भी नहीं आया।
ढुलाई ठेकेदारों को लगाई जा रही चपत
ढुलाई ठेकेदार विजय बंसल टैणी एवं कालू ने बताया कि उन्होंने सरसों ढुलाई का ठेका लिया हुआ है। सरसों खरीद के बाद ट्रकों के माध्यम से जब इस माल को नैफेड के गोदामों तक पहुंचाया तो नैफेड कर्मचारियों ने बरखी(जांच यंत्र) के जरिए सरसों के कट्टों की जांच की। जांच में सरसों के कट्टों में बाजरे एवं रेत की मिलावट सामने आई। भिवानी से खरीदे अनेक कट्टों में मिलावटखोरी सामने आई जिन्हें वापस भेजा गया है। उनका आरोप है कि नैफेड द्वारा सरसों में मिलावट के कट्टों की छंटाई की एवज में ढुलाई ठेकेदार से ही 15 रुपये कट्टे के हिसाब से वसूले गए, जबकि इस माल को वापस लाने का भी कोई मेहनताना उन्हें नहीं मिला। ढुलाई ठेकेदारों का आरोप है कि सरसों में मिलावटखोरी हैफेड के खरीद अधिकारियों एवं आढ़तियों की मिलीभगत से हुई है, लेकिन इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा है। आरोप है कि सरसों में करीब 10 फीसदी बाजरे एवं अन्य कचरे की मिलावट की गई है। क्योंकि इस समय बाजरे की कीमत 1200 रुपये और सरसों की कीमत प्रति क्विंटल चार हजार रुपये आंकी जा रही है, ऐसे में मिलावटखोरी के गोरखधंधे में लिप्त हैफेड के अधिकारियों एवं आढ़तियों ने सरकार को करोड़ों रुपये का चुना लगाया है।
15 रुपये कट्टा छंटाई के हिसाब से 1560 रुपये भी ठेकेदार से वसूले गए जबकि उसे वापस इस माल को भिवानी तक लाने का भी कोई किराया नहीं मिला। अगर प्रदेश सरकार मिलावटखोरी मामले में हुए भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच कराती है तो कई अधिकारियों के शामिल होने एवं करोड़ों के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
जो दोषी होगा, उस पर की जाएगी कार्रवाई : होशियार सिंह
हैफेड के डीएम होशियार सिंह ने बताया कि मिलावटी खोरी मामले की जांच कराई जाएगी, जो भी कर्मचारी या फिर आढ़ती जिम्मेवार होगा, उसके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रात को होता है मिलावटखोरी का खेल
मिलावटखोरी का खेल रात को होता है। सरसों की भराई रात में की जाती है। इसी दौरान मिलावटखोरी का खेल खेला जाता है। चार हजार रुपये क्विंटल वाली सरसों में करीब 1300 रुपये क्विंटल वाला बाजरा और करीब 1735 रुपये क्विंटल वाले गेहूं के साथ-साथ गेहूं, बाजरा का खराब बचा अवशेष, मिट्टी की भी मिलावट सामने आई है।
कई जिलों में जाती है सरसों
भिवानी में सरसों की सरकारी खरीद होने के बाद नैफेड के वेयर हाउस में भेजा जाता है। सरसों को भिवानी से नैफेड के गोदामों हिसार, फतेहाबाद, हांसी, लाखन माजरा, घरौंडा, अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल, रोहतक, हिसार, बरवाला में भेजा जाता है जहां पर इनका सुरक्षित भंडारण किया जाता है।
वर्जन:::
रात को भराई कार्य होने के कारण कई बार मिलावट हो जाती है। अब इसकी दोबारा से छटाई करवाकर भराई करवाई जाएगी और जो सरसों कम होगी, उसकी जिम्मेवारी ठेकेदार की होगी।
-सुरेंद्र कुमार, मैनेजर हैफेड