फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सांडों की लड़ाई में टक्कर लगने से निजी स्कूल बस सहायक की मौत

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
भिवानी। लावारिस सांडों ने बुधवार को एक और जिंदगी छीन ली। शांति नगर में सांडों की लड़ाई के दौरान चपेट में आए निजी स्कूल बस के सहायक की मौत हो गई। मौत पर परिजनों और गली वासियों ने रोष जताया और लावारिस पशुओं की समस्या के समाधान की मांग की।
घटना दोपहर बाद करीब पौने चार बजे का है। शांति नगर गली नंबर 13 वासी करीब 58 रवि कुमार घर से किसी कार्य से जा रहे थे। जब गली से निकलने लगे तो वहां सांड आपस में लड़ रहे थे। वह बचने के लिए गली में एक प्लॉट की दीवार के साथ निकलने लगे तो सांड लड़ते हुए उस ओर आ गए और उन्हें टक्कर मारी। जिससे वह दूर जा गिरे। सांडों ने वहां लड़ते हुए एक प्लॉट की दीवार भी तोड़ डाली। घायल रवि कुमार को उपचार के लिए सामान्य अस्पताल लाया गया। जहां सामने आया कि साड की टक्कर से उनके सिर में गंभीर चोट और पसलियां भी टूट गई है। अभी उन्हें प्राथमिक उपचार कर रेफर करने की तैयारी की जा रही थी कि उन्होंने दम तोड़ दिया। वह एक निजी स्कूल की बस में सहायक के पद पर कार्यरत थे। मृतक के पुत्र विक्की ने बताया कि वे दो भाई है। उसके पिता रवि कुमार एक प्राइवेट स्कूल बस पर सहायक थे। प्रशासन को लावारिस पशुओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इस समस्या का समाधान करना चाहिए। हादसे की सूचना पर नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन भवानी प्रताप व अन्य भी अस्पताल पहुंचे।
विज्ञापन

अब तक 10 गवां चुके है जान
लावारिस पशुओं की टक्कर से अब तक 10 लोग अपनी जान गवां चुके है। बीते 22 नवंबर को सेक्टर 13 वासी शिक्षक सत्यप्रकाश की मौत हो गई थी। वह पांच अक्तूबर की रात को लावारिस पशुओं की टक्कर से घायल हुए थे। डेढ़ महीना जिंदगी-मौत से जूझने के बाद 22 नवंबर को अंतिम सांस ली। अक्तूबर माह में हुन्नामल प्याऊ के पास हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके नौरंगाबाद गांव के पास करीब 15 दिन पहले हादसे में एक महिला समेत चार लोग घायल हो गए थे। इससे पहले दादरी गेट के पास एक प्राइवेट स्कूल के हेडमास्टर, राधा स्वामी सत्संग भवन के पास बाइक सवार एक दुकानदार, चांग गांव में एक बुजुर्ग महिला, सेवा नगर में एक महिला भी लावारिस पशुओं का शिकार होकर अपनी जान गवां चुकी है। पिछले सप्ताह भी एक लावारिस सांड ने शहर में खूब उत्पात मचाते हुए करीब 13 लोगों को घायल किया था।
विज्ञापन

शहर में बचे है करीब एक हजार लावारिस पशु
शहर की सड़कों पर अभी भी एक हजार के करीब लावारिस पशु है जो हर रोज हादसों का कारण बन रहे है। अनेक लोगों के लिए ये जानलेवा साबित हो रहे तो वाहन तोड़ना, दुकानदारों को नुकसान पहुंचाना आम बात है। नंदीशाला बनने के बावजूद जिला प्रशासन लावारिस पशुओं की समस्या का समाधान नहीं कर पाया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें