अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। गांव बड़ेसरा में सरपंच चुनाव विवाद में हुए खूनी संघर्ष का शिकार हुए बलजीत का पोस्टमार्टम कराने से पहले 27 एक्स-रे करने पड़े। इसके बाद भी शरीर में गोली नहीं मिली, जबकि शरीर पर पांवों, जांघ के पास गोली के निशान हैं। तेजधार हथियार के पूरे शरीर पर निशान मिले। शव का पोस्टमार्टम हुआ तो परिजनों ने स्वयं की जान को खतरा बताते हुए शव लेने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि पहले आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए, उसके बाद शव का अंतिम संस्कार होगा। समाचार भेजे जाने तक शव मोर्ची में रखा था और परिजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे। इस बीच, पुलिस ने मामले में शिकायत पर 52 नामजद लोगों के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास का मामला दर्ज किया गया है।
शनिवार शाम को चुनावी विवाद के चलते बड़ेसरा गांव में खूनी संघर्ष हुआ था। इसमें एक व्यक्ति 55 वर्षीय बलजीत की मौत हो गई थी, जबकि पांच अन्य बलजीत का पिता सूबे सिंह, भल्लेराम, हुकम सिंह, माल्हाराम, महेंद्र घायल हो गए थे। घायलों का हिसार में इलाज चल रहा है।
इसी मामले में रविवार को पुलिस कार्रवाई हुई। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए शव गृह लेकर पहुंची तो कपड़ों पर लगे बारुद के और जले के निशान को देखते और शरीर पर बने निशानों के कारण गोली लगने की आशंका जताई गई। इसके बाद एक्स रे रूम ले जाया गया। शरीर पर चोट के इतने निशान थे कि करीब 27 एक्स-रे करवाए गए। 27 एक्स-रे के बाद भी न गोली मिली और न ही स्पष्ट हो पाया कि बारूद का निशान कैसे आया। चिकित्सक भी असमंजस की स्थिति में रहे। इसके बाद विसरा जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। दोपहर बाद पोस्टमार्टम हुआ तो परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। परिजनों ने कहा कि उनकी जान को खतरा है। ऐसे में पहले आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। उसके बाद ही शव अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जाएगा। ग्रामीण और परिजन अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। परिवार की महिलाएं भी धरने पर बैठ गईं।
अब भी मिल रही है धमकी
मृत बलजीत के परिजनों ने बताया कि वे दो साल से विवाद को टाल रहे थे। यदि पुलिस चाहती और समय पर शिकायत के बाद कदम उठाती तो यह नौबत नहीं आती। मार्च में परिवार के सदस्य राज कुमार पर हमला किया गया था। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। परिवार के दो अन्य सदस्यों पर भी हमले की कोशिश हो चुकी है। इसकी पुलिस से शिकायत भी की गई, मगर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मृतक बलजीत के लड़के विकास ने बताया कि उस पर ही दो बार हमला हुआ, मगर वह बच निकला। पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस कर्मी कहते हैं कि कोई चोट तो नहीं लगी। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अभी भी उन्हें फोन कर धमकी दी जा रही है।
फर्जी सर्टिफिकेट मामले में सरपंच, सरपंच पति और दो मास्टर गए जेल
विवाद चुनावी रंजिश का है। चुनाव में आनंद बबलू की पत्नी सुदेश सरपंच बनी तो दूसरे पक्ष ने उसके सर्टिफिकेट पर सवाल उठाए। जांच हुई तो सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए। इसके बाद सरपंच, सरपंच पति और दो शिक्षकों पर केस दर्ज हुआ था। उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। वे करीब दो महीने जेल में रहे थे। इसके बाद विवाद गहराता गया। पिछले सप्ताह बलजीत के ही चचेरे भाई राज कुमार पर हमले के मामले में दोनों पक्ष थाने में जुटे थे। इस दौरान भी खुलेआम मारने की धमकी दी गई थी।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला
मामले में पुलिस ने 52 लोगों को नामजद करते हुए हत्या, हत्या प्रयास का केस दर्ज किया है। इनमें सरपंच पति आनंद बबलू, सरपंच सुदेश, अंकित, नीलम, जीता, महेंद्र, दिलबाग सिंह, वजीर, जगमत, धर्मेंद्र, मडकू, मीनू, जगमत की पत्नी, मोनू, कालू, सोनू, भोलू, अजीत, संदीप, रमेश, पवन, विजय, प्रमोद, बलवान, गुड्डी, रवींद्र, भूपेंद्र, रमेश, प्रवीण, राज, परमेश्वर, अमित, नान्हा, बंटू, विरेंद्र, जगदीप, राम कुमार, सुधीर, राजबीर, बलजीत, कृष्ण, बिंद्र, बिजेंद्र, रमेश, गुड्डी, रवींद्र नंबरदार की पत्नी, सुरेश, विरेंद्र, रमेश फौजी की पत्नी, नरेश की पत्नी के नाम शामिल हैं।
बलजीत की हत्या मामले में शिकायत के आधार पर 52 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों की तलाश की जा रही है। श्रीभगवान, एसएचओ
बवानीखेड़ा थाना