छेड़छाड़ पीड़िता बेटी को न्याय दिलाने के लिए एक महिला ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी है। शिकायत में सीडब्ल्यूसी की एक सदस्या पर स्कूल संचालक को बचाने के आरोप लगाए हैं। साथ ही रिपोर्ट में बच्ची के हक में फैसला देने की बजाए स्कूल संचालक के पक्ष में रिपोर्ट बनाने के आरोप जड़े हैं।
उल्लेखनीय है कि जून माह में एक किशोरी ने स्कूल टीचर पर छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। किशोरी की मां ने इसकी शिकायत थाने में दी। मामले की जांच बाल कल्याण समिति को सौंपी गई। किशोरी की मां ने बताया कि 28 जून को महिला थाना प्रभारी एसआई हवाकौर उसे व उसकी बेटी को काउंसिलिंग के लिए बाल कल्याण समिति कार्यालय में लेकर गई थी। वहां समिति सदस्यों ने उसकी बेटी को बंद कमरे में बुलाया और जब वह अंदर जाने लगी तो उसे गेट पर ही रोक दिया। बंद कमरे में उसकी बेटी पर दबाव डालकर काउंसिलिंग के बहाने एसएलसी लेने के लिए एक पत्र लिखवा लिया। जबकि उसकी बेटी ने बार-बार उनको कहा कि मेरी मां को अंदर बुला दो, लेकिन समिति की सदस्या ने धमकाते हुए कहा कि वे जो कर रहे हैं, यह उसके और उसकी मां के भले के लिए कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्हें काउंसिलिंग के बाद बताया गया कि जो लिखवाया है, वह उनके भले के लिए है। महिला ने बताया कि उसकी बेटी उसी स्कूल में पढ़ना चाहती है, लेकिन बाल कल्याण समिति ने स्कूल के सदस्यों के साथ मिलकर एक फर्जी रिपोर्ट तैयार कर ली। इसके बाद 25 जुलाई को दोबारा उसे व उसकी बेटी को समिति में बुलाया गया। उस समय उसकी बेटी ने एक पत्र लिखकर बयान दिया की उसे उसी स्कूल में दाखिला दिलवाया जाए और स्कूल निदेशक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, लेकिन समिति ने उसके द्वारा दिए बयानों को स्कूल को बचाने के लिए अनदेखा कर दिया। महिला ने बताया कि उसकी बेटी की पढ़ाई बाधित हो रही है और उसके भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।