भिवानी। जिला मुख्यालय की मंडी में मंगलवार को आढ़तियों ने हड़ताल कर दी और बाजरे की फसल के साथ मंडी पहुंचे किसानों की 30 ट्राॅली वापस लौटा दी। आढ़तियों ने अल्टीमेटम दिया कि जब तक मंडी में बाजरे की सरकारी खरीद नहीं होती तब तक वे किसानों का बाजरा नहीं उतरवाएंगे।
किसान संगठनों का भी मंडी के गेट पर लगातार दूसरे दिन धरना जारी रहा। मंगलवार को मौसम खराब होने के बावजूद मंडी में करीब एक लाख क्विंटल बाजरा खुले आसमान के नीचे पड़ा रहा और बारिश से सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं दिखाई दिए। पहले से ही मौसम की मार झेल चुका बाजरा सरकारी खरीद के लायक नहीं बचा है। यदि बारिश में बाजरा भीग जाता है तो यह खाने लायक भी नहीं रहेगा।
भिवानी मंडी में मंगलवार को किसी भी आढ़ती ने किसानों का बाजरा नहीं उतरवाया। आढ़तियों ने फोन पर ही किसानों को मंडी न आने के लिए मना किया लेकिन करीब 30 ट्राॅली में बाजरा लेकर पहुंचे किसानों को वापस लौटा दिया गया।
दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के प्रधान नरेश बंसल उर्फ भूरु ने बताया कि आढ़तियों की बैठक में मंगलवार से मंडी में हड़ताल का एलान किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी खरीद एजेंसी किसानों का बाजरा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदती है तो नई आवक नहीं होने दी जाएगी।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) चढ़ूनी के जिलाध्यक्ष राकेश आर्य के नेतृत्व में किसानों का धरना मंडी गेट पर दूसरे दिन भी जारी रहा। किसान जल्द से जल्द सरकारी खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं। किसान मजदूर शोषित मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पृथ्वी सिंह श्योराण और उनके संगठन के कार्यकर्ताओं ने धरने में शामिल होकर किसानों की मांग को जायज ठहराया। राकेश आर्य ने बताया कि आंदोलन को व्यवस्थित रूप से चलाने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई तो तीन अक्तूबर को बड़ा फैसला लिया जाएगा।
मंडी में मंगलवार से किसानों की बाजरे की नई आवक नहीं कराई गई है। पहले से मंडी में दो लाख कट्टे बाजरा की आवक हो चुकी है। मौसम खराब होने पर फसल की कोई सुरक्षा नहीं है। सरकारी खरीद एजेंसी किसानों का बाजरा नहीं खरीद रही है। जब तक सरकारी खरीद शुरू नहीं होती, आढ़ती खरीद का बहिष्कार जारी रखेंगे और नई आवक नहीं कराएंगे।
- नरेश बंसल उर्फ भूरु, प्रधान दी ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन भिवानी
किसानों की समस्या उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाई गई है ताकि सरकारी खरीद सुचारू चल सके। यदि किसी किसान को अपना बाजरा बाहर बेचना है तो वह बेच सकता है और उसे भावांतर का लाभ मिलेगा। किसान संयम बनाए रखें। उच्चाधिकारियों तक किसानों की समस्या पहुंचा दी गई है। - दिलबाग गिल, जिला प्रबंधक हरियाणा राज्य भंडारण निगम, भिवानी