शहर में स्थित मेडिकल कॉलेज का ओपीडी भवन।
भिवानी। दिनभर शीतलहर चलने के कारण धूप निकलने के बावजूद लोगों को ठंड से राहत नहीं मिल रही। जिले में बढ़ती ठंड और शीतलहर के चलते कान, नाक और गले की बीमारियों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ठंडी खाद्य सामग्री का अधिक सेवन गले के संक्रमण का मुख्य कारण बन रहा है, जबकि शीतलहर की सीधी चपेट में आने से कान और नाक प्रभावित हो रहे हैं।
मंगलवार को शहर का अधिकतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पंडित नेकीराम शर्मा राजकीय मेडिकल कॉलेज की ईएनटी (कान, नाक व गला) ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 120 मरीज गले और कान में संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। ओपीडी में आने वाले मरीजों में गले में दर्द, कान में दर्द, नाक से पानी बहना और नजला जैसी समस्याएं प्रमुख रूप से सामने आ रही हैं।
मेडिकल कॉलेज में कार्यरत ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. शुभम महता ने बताया कि इस मौसम में नजला, कान और गले में संक्रमण के मरीजों की संख्या अधिक हो जाती है। उन्होंने कहा कि ठंडी खाद्य सामग्री का अधिक सेवन, कानों में नुकीली वस्तुओं का प्रयोग और सीधे ठंडी हवा का संपर्क रोग बढ़ाने के मुख्य कारण हैं। डॉ. महता ने लोगों को सलाह दी कि इस मौसम में ठंडी चीजों से परहेज करें, कानों में किसी प्रकार के घरेलू नुस्खे न अपनाएं और समस्या होने पर तुरंत नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लें। उन्होंने कहा कि नजला पहले से रहता है लेकिन सर्दी शुरू होते ही परेशानी बढ़ जाती है। इसलिए इस मौसम में विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
शीतलहर के दौरान अगर ठंडी हवाएं नाक व कानों के माध्यम से शरीर में प्रवेश करती हैं तो कान, नाक व गला रोगों के बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी के मौसम में खांसी-जुकाम के साथ ही कानों में भी परेशानी आ जाती है। इस कारण कानों में दर्द और कम सुनाई देने जैसे लक्षण देखे जाते हैं। कानों में किसी प्रकार की परेशानी होने पर घरेलू नुस्खों का प्रयोग न करें। ठंडी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल कम करें और नजदीकी चिकित्सक से परामर्श के बाद ही उपचार शुरू करें। – डॉ. शुभम महता, ईएनटी रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, भिवानी