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सीएम फ्लाइंग ने तहसील कार्यालय में खंगाला रजिस्ट्रियों का रिकार्ड, 792 पर जांच की आंच

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भिवानी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्रियों के संबंध में जानकारी लेने पहुंचे लोग। -संवाद न्यूज एजेंस - फोटो : Bhiwani
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तहसील कार्यालयों में भूमि की रजिस्ट्रियों में गड़बड़झाले की आशंका पर सरकार सख्त हो गई है। सोमवार को भिवानी तहसील कार्यालय में सीएम फ्लाइंग ने भी लॉकडाउन के बाद हुई रजिस्ट्रियों से जुड़ा रिकार्ड खंगाला और कुछ अहम जानकारियां जुटाई। वहीं अकेले भिवानी तहसील में ही 792 रजिस्ट्रियां जांच के दायरे में आ गई। रजिस्ट्री बंद होने से अकेले भिवानी तहसील कार्यालय से करीब 10 लाख स्टांप फीस का नुकसान सरकार को झेलना पड़ा।
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अब जांच के दायरे में आई 792 रजिस्ट्रियों की परतें खुलेंगी तो अधिकारी भी नपेंगे। तहसील कार्यालयों में दलालों का मकड़जाल फैला हुआ है। अनलॉक के दौरान जैसे ही रजिस्ट्रियां शुरू की गई तो प्रतिबंधित क्षेत्र की भी पिछले दरवाजे से रजिस्ट्रियां हुई। हैरानी की बात है कि शहरी दायरे में नगर परिषद की असेसमेंट यानी गृहकर रसीद के आधार पर भी तहसील कार्यालय में भूमि की रजिस्ट्रियां की गई।
अकेले भिवानी तहसील कार्यालय में लॉकडाउन खुलने के बाद 50 टोकन रोजाना काटे गए। तहसील कार्यालय में दलालों का जाल इतना सक्रिय है कि भूमि की रजिस्ट्रियां कराने के लिए लोगों को टोकन मुहैया कराने के लिए भी कालाबाजारी की गई। प्रत्येक टोकन के नाम पर एक हजार से लेकर पांच हजार तक अवैध वसूली के आरोप लगे। जिला योजनाकार विभाग द्वारा शहरी हद से बाहर भूमि की रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध है। लेकिन इसके बावजूद भी तहसील कार्यालय में दलालों के माध्यम से काटी गई अवैध कॉलोनियों की धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां हुई हैं।
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ये हैं रजिस्ट्री के लिए सरकार की तय फीस
रजिस्ट्री लेखन के लिए 230 रुपये प्रति रजिस्ट्री, एग्रीमेंट के लिए 50 रुपये फीस, वसीयत लेखन 203 रुपये फीस, मुख्तयारनामा के लिए 103 रुपये फीस निर्धारित है। कैंसिल कराने के लिए 103 रुपये फीस ली जाती है। पांच लाख से नीचे कीमत की रजिस्ट्री पर 1100 रुपये, पांच लाख से ऊपर पांच हजार, दस लाख से अधिक कीमत की भूमि पर दस हजार रुपये सरकारी फीस निर्धारित है। मगर इस सरकारी तय शुल्क से कई गुणा अधिक खर्च के बाद ही रजिस्ट्री बनती है।
असेसमेंट पर नहीं हो सकती शहरी दायरे में भूमि की रजिस्ट्री
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशानुसार शहरी दायरे में भूमि की असेसमेंट यानी गृहकर रसीद के आधार पर रजिस्ट्री नहीं की जा सकती है। इस तरह की अगर पहले भी कोई रजिस्ट्री हो चुकी है तो वो भी रद्द होगी। संगठन ने भी आरटीआई में ऐसी कई रजिस्ट्रियों के रिकार्ड जुटाए हैं।
वर्जन-
सरकार ने तहसील कार्यालयों में 17 अगस्त तक रजिस्ट्रियां बंद कर दी हैं। 22 अप्रैल के बाद से भिवानी तहसील में 497 रजिस्ट्रियां की गई हैं, जो सभी नियमों के तहत की गई हैं। टोकन की कालाबाजारी का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। प्रतिबंधित दायरे की कोई रजिस्ट्री नहीं की गई। डॉक्यूमेंट राइटर ही भूमि की रजिस्ट्री के दस्तावेज तैयार करते हैं। सीएम फ्लाइंग ने भी रजिस्ट्रियों के संबंध में कुछ तथ्य विभाग से जुटाए हैं।
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- मोहनलाल, तहसीलदार भिवानी।
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