ढिगावा जाटान के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में खुले में लगाई जा रही छात्राओं की कक्ष
ढिगावामंडी। ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे बैठकर लड़कियों को अक्षर ज्ञान लेना मजबूरी बन गई है। पिछले दस सालों से ढिगावा जाटान के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का नया भवन निर्माण अधूरा पड़ा है। इस वजह से छात्राओं की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे जमीन पर ही लगाई जा रही हैं। टाट पट्टी मुश्किल से मिल पा रही है जबकि सिर पर छत की लंबे अर्से से आस बनी हुई है।
हरियाणा में भाजपा सरकार के प्रथम कार्यकाल में यहां लड़कियों की संख्या को देखते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत कक्षा पहली से बारहवीं तक के लिए कन्या स्कूल मंजूर किया गया था। वर्ष 2016 में इस स्कूल की नींव तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रखी थी। शिलान्यास को लगभग दस वर्ष बीत चुके हैं लेकिन नया भवन अभी तक प्राप्त नहीं हुआ।
अभिभावक लगातार प्राचार्य और स्टाफ पर दबाव डालकर बेटियों को ठिठुरती ठंड से बचाने के लिए नए भवन में कक्षाएं लगाने की मांग कर रहे हैं। विद्यालय प्राचार्या सरोजबाला पूनिया ने बताया कि अभिभावकों का यह दबाव लगातार बना हुआ है। हाल ही में एसएमसी और पीटीएम मीटिंग में अभिभावकों ने प्रस्ताव पारित करके ग्राम पंचायत से भी मिलने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि स्थायी या अस्थायी तौर पर नए भवन में कक्षाएं लगवाने की अनुमति मिलने पर ही आगे की कार्रवाई होगी।
निर्माणाधीन भवन के ठेकेदार ने बताया कि कभी कोरोना काल कभी बजट की कमी और कभी लेबर न होने के कारण यह कार्य लंबित रहा। उन्होंने बताया कि अब भवन का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और अभिभावक बार-बार काम की स्थिति देखने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कक्षाएं अस्थायी तौर पर लगाई जा सकती हैं इसके बाद भवन विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
खंड शिक्षा अधिकारी और एसडीएम से मुलाकात करेंगे : सरपंच
सरपंच धर्मवीर नेहरा ने बताया कि एसएमसी और पीटीएम मीटिंग में अभिभावक नए भवन में कक्षाएं लगाने के लिए दबाव डाल रहे थे। उसी दिन उनकी टीम ने भवन का निरीक्षण किया जो अस्थायी तौर पर कक्षाएं लगाने लायक है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल्द ही खंड शिक्षा अधिकारी और उपमंडलाधीश से अनुमति के लिए बातचीत करेंगे।
अधिकारी बोले- मौके पर जाकर लेंगे निर्णय
खंड शिक्षा अधिकारी विजय प्रभा और उपमंडलाधीश मनोज दलाल ने बताया कि अगर उन्हें इस प्रकार का प्रार्थना पत्र मिलेगा तो वे मौके पर जाकर भवन की स्थिति का जायजा लेंगे और जनहित को ध्यान में रखते हुए अगला कदम उठाएंगे।