इमरजेंसी में हर रोज चिकित्सक और मरीजों के बीच झगड़ा होना आम बात है। क्योंकि यहां एक ही डाक्टर की ड्यूटी होती है। उसे ही सभी मरीजों का उपचार करने के साथ-साथ एमएलआर काटने, ऑनलाइन करने की भी जिम्मेदारी रहती है। अब सिविल सर्जन ने इमरजेंसी ड्यूटी देने वाले चिकित्सकों की मदद के लिए एक विशेषज्ञ लगाने का प्लान तैयार किया है। जिसके तहत स्वयं सिविल सर्जन और डिप्टी सिविल सर्जन का चार्ज संभालने वाले सभी सात चिकित्सक इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर का सहयोग करेंगे। इन विशेषज्ञों की ड्यूटी सुपरविजन और क्लीनिकल हेल्प के तौर पर रहेगी।
सामान्य अस्पताल की इमरजेंसी में औसतन दो सौ से तीन सौ तक मरीज हर रोज आते हैं। इमरजेंसी में तीन शिफ्टों में चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई जाती है। मगर अक्सर समस्या ये रहती है कि एक से ज्यादा मरीज एक साथ आने से इमरजेंसी में व्यवस्था बिगड़ जाती है। हरेक मरीज चाहता है कि पहले उसे इलाज मिले मगर चिकित्सक का प्रयास रहता है कि ज्यादा गंभीर मरीजों को पहले इलाज दिया जाए। इस कारण मरीजों के परिजनों और चिकित्सकों में भी विवाद भी होता है। ऐसा ही विवाद पिछले सप्ताह भी सामने आया था जब मरीज ज्यादा होने के कारण चिकित्सक विधायक का फोन अटेंड नहीं कर पाया था और स्वयं विधायक इमरजेंसी पहुंच गए थे। उस समय चिकित्सकों को ढंग से कार्य करने और मरीजों से अच्छे से व्यवहार करने की चेतावनी भी दी गई थी। ऐसे झगड़े इमरजेंसी में आम है। दो चिकित्सकों की ड्यूटी लगाना संभव नहीं है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के पास इतने चिकित्सक नहीं है। ऐसे में सिविल सर्जन ने डिप्टी सिविल सर्जन का सहयोग लेकर इसके लिए नई प्लानिंग की है।
स्वयं से शुरूआत करेंगे सिविल सर्जन : जिले में कार्यकारी सिविल सर्जन का चार्ज संभाल रहे डॉ. कृष्ण ने प्लानिंग बनाने के साथ-साथ इसे लागू करने के लिए भी खुद से ही शुरूआत की है। अन्य डिप्टी सिविल सर्जन की ड्यूटी लगाने से पहले वे स्वयं इमरजेंसी में ड्यूटी देंगे। मरीजों का इलाज करेंगे और मरीजों से इमरजेंसी में मिल रहे इलाज और सुविधाओं के बारे में फिडबैक भी लेंगे।
ये करेंगे इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर का सहयोग
इमरजेंसी में स्वयं सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. संध्या गुप्ता, डॉ. मीना बरबर, डिप्टी सिविल सर्जन का चार्ज संभाल रहे मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील, डॉ. हरेंद्र, डॉ. शिव कुमार, दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद की इमरजेंसी में सुपरविजन और क्लीनिकल हेल्प की ड्यूटी लगाई जाएगी।
इमरजेंसी में जूनियर डॉक्टर की सहायता और मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए प्लानिंग बनाई है कि इमरजेंसी में कोई विशेषज्ञ भी रहे। ऐसे में मेरी खुद की और अन्य डिप्टी सिविल सर्जन की ड्यूटी लगाई है। वे अपनी सुविधानुसार दो घंटे, तीन घंटे या कम-ज्यादा जैसा उनके पास समय हो, वे इमरजेंसी में जूनियर का सहयोग करें।
- डॉ. कृष्ण कुमार, कार्यकारी सिविल सर्जन