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एक माह तक ठेकेदार ने कराई खेतों में मजदूरी, दिहाड़ी मांगी तो रात को भगा दिया

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प्रवासी मजदूरों से जानकारी लेते पूर्व सरपंच रामकुमार - फोटो : Bhiwani
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साहब ठेकेदार और सरपंच ने हमारी मजबूरी का फायदा उठाया है। एक महीने तक खेतों में काम कराया और जब दिहाड़ी मांगी तो उन्हें रात में ही गांव से बाहर सुनसान जगह पर धमकी देकर छुड़वा दिया। देर रात को ही करीब 35 से 40 किलोमीटर पैदल चलकर वे शहर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। ये व्यथा उन प्रवासी मजदूरों ने बयां कि जो 16 मार्च को यूपी से खेतों में काम करने के लिए तोशाम क्षेत्र के एक गांव में ठेकेदार के माध्यम से लाए गए थे।
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आरोप है कि प्रवासी मजदूरों से खेतों में सरसों फसल कटाई और कढ़ाई का काम कराया गया, लेकिन जब उन्होंने अपनी दिहाड़ी मांगी तो उन्हें जान से मारने की धमकी देकर गांव की सीमा से ही रातों-रात बाहर छुड़वा दिया। रात करीब 10 बजे सड़क से रोहतक रोड पर जा रहे इन प्रवासी मजदूरों की वीडियो पुलिस अधिकारी के पास व्हाट्स एप भेजी गई तो पुलिस भी हरकत में आई। पैदल जा रहे इन मजदूरों को पुलिस ने आगे जाने से रोका और फिर पूछताछ की। पुलिस ने पूछताछ के बाद इन सभी मजदूरों को रोहतक रोड स्थित गांव निनान के राजकीय स्कूल में बने शेल्टर होम में भेजा।
निनान शेल्टर होम में पहुंचे बरेली (यूपी) के एक गांव निवासी मजदूर आदेश कुमार, अमित कुमार, विपिन कुमार, किशनलाल ने बताया कि 16 मार्च को उन्हें गांव का ही एक ठेकेदार भिवानी जिला के तोशाम के एक गांव में सरसों की फसल कटाई और कढ़ाई के लिए लेकर आया था। एक महीने तक उन्हें गांव से बाहर खेतों में ही रखा गया और काम कराया गया। उनका कहना है कि मंगलवार शाम को उन्होंने ठेकेदार से मजदूरी मांगी थी। इसके बाद ठेकेदार गांव के जनप्रतिनिधि को बुला लाया और फिर सभी 10 मजदूरों को एक-एक हजार रुपये का भुगतान कर दिया। इसके बाद जब बाकी मजदूरी मांगी तो उन्हें जान से मरवाने की धमकी दी। उन्हें एक गाड़ी में बैठाकर गांव की सीमा से दूर किसी सुनसान जगह पर छोड़ दिया। वे रात को 35 से 40 किलोमीटर चलकर शहर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोका और फिर शेल्टर होम में छोड़ दिया।
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निनान शेल्टर होम में प्रवासी मजदूरों के लिए चल रही है निशुल्क सेवा
गांव निनान के सरपंच रामकुमार उर्फ मांगेराम भगत ने बताया कि वे श्रीश्याम खाटू मंडल की सेवा से जुड़े हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद से ही सरकारी स्कूल में शेल्टर होम की व्यवस्था संभाले हुए हैं। यहां पर फिलहाल 60 प्रवासी मजदूर ठहरे हुए हैं। जिन्हें दो वक्त का खाता और दो वक्त चाय उपलब्ध कराई जा रही है। रात को कुछ प्रवासी मजदूरों को पुलिस यहां लेकर आई थी। लेकिन इन मजदूरों की एंट्री प्रशासन के निर्देश पर ही की जाएगी, फिलहाल इन्हें खाना पानी उपलब्ध करा दिया है।
ये बोले डरे सहमे मजदूर
साहब, मेरे गांव से दस लोग खेतों में काम करने के लिए लाए गए थे। मैं भी मजदूरी का काम करता हूं। सरपंच ने अपने हिसाब से पर्ची बनाई और जबरन ठेकेदार की पर्ची पर हम सभी के साइन करा लिए। कहीं शिकायत करने पर भी उल्टा उन्हें ही पुलिस में पकड़वाने और जान से मरवाने की धमकी दी गई। हम तो सुनसान जगह पर छोड़े जाने के बाद अपनी जान बचाकर यहां तक पहुंचे हैं।
- राजीव, प्रवासी मजदूर।
जब हम लोगों ने ठेकेदार से मजदूरी मांगी तो सरपंच ने उन्हें डंडे मरवाए और फिर उन्हें जबरन गाड़ी से किसी सुनसान जगह पर अपने हाल पर छुड़वा दिया। हमें तो उस जगह का भी नाम नहीं मालूम था, जहां उन्हें छोड़ा गया। हम पैदल चलकर ही रात को शहर तक आए हैं। साहब हमारी जान को भी खतरा है, कहीं वे हमें यहां ढूंढकर जान से न मरवा दें। हमारी मजदूरी भी नहीं दी।
- आदेश, प्रवासी मजदूर।
यहां रातों-रात थी गांव जाने की तैयारी
शहर के टाइयान पाना में रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने भी रातों-रात शहर छोड़ने का प्लान बनाया मगर रोहतक रोड पर पुलिस ने रोक लिया। मजदूरों ने बताया कि उनके काफी लोग आगरा गए है और उन्हें पता लगा कि अब दिल्ली से ट्रेन चलने लगी है तो वे जा रहे थे। बाद में जांच में सामने आया कि मकान मालिक ने इनका किराया भी माफ कर रखा था और पार्षद प्रतिनिधि भवानी प्रताप (पार्षद मुनिया तंवर का भाई) ने उक्त मजदूरों को खाद्य सामग्री भी पर्याप्त मात्रा में दिला रखी थी। बावजूद इसके एक ट्रक चालक के साथ साठ-गाठ कर उक्त मजदूर शहर छोड़ने की तैयारी में थे। रात को ही इन्हें वापस घर भेजा गया।
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