दुष्कर्म पीड़ित एक युवती ने रविवार सुबह जिला सामान्य अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन युवती ने नवजात बच्चे को अपनाने से ही साफ इंकार कर दिया। इतना ही नहीं नवजात बच्ची को दूध पिलाने से भी इंकार कर दिया। जिसके बाद चिकित्सकों ने बच्ची को पाउडर का दूध पिलाया। फिलहाल जच्चा बच्चा दोनों की स्थिति ठीक बताई जा रही है। वहीं मामले की सूचना महिला पुलिस थाने में भी दी गई।
अगस्त माह में शहर की एक कालोनी मेें अपने ननिहाल में रहने वाली युवती के साथ रिश्ते में नाना लगने वाले युवक पर दुष्कर्म के आरोप लगाते हुए महिला पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। महिला पुलिस थाने में आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज हुआ और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
दुष्कर्म पीड़िता युवती की मां ने बताया कि उसके पति की मौत करीब 15 साल पहले हो चुकी है। इसके बाद वह अपने मायके में रहने आ गई थी। वह मंडी में मजदूरी करती है। उनके मकान के साथ लगती दीवार के साथ ही आरोपी का मकान है। आरोपी ने उसकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे किसी को कुछ बताने के लिए डराया धमकाया गया। महिला ने बताया कि गत चार जुलाई को ही उसने अपनी 20 वर्षीय बेटी की शादी कर दी थी। लेकिन शादी के बाद आरोपी युवक ने उसकी बेटी की ससुराल में फोन कर उसके दामाद को खुद बताया कि उसकी बेटी के पेट में पलने वाला बच्चा उसका है और उसका गर्भपात मत कराना। यह सुनकर सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई और आरोपी युवक ने ही मामले की शिकायत चंडीगढ़ कर दी। जिसके बाद मामले की जांच हुई तो पीड़ित लड़की ने आरोपी युवक की करतूत का खुलासा कर दिया। जिसके बाद लड़की ने महिला पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर उसके साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने और दुष्कर्म के बाद गर्भवती होने के आरोप लगाए। जिस पर आरोपी युवक के खिलाफ महिला पुलिस थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। महिला ने बताया कि लड़की के गर्भवती होने की किसी को कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन लड़की ने आरोपी के डर से किसी को कुछ भी नहीं बताया था।
अगर दुष्कर्म पीड़िता नवजात बच्चे को नहीं रखना चाहती है तो इस संबंध में सीडब्ल्यूसी को सूचित करना अनिवार्य है। जिसके बाद ही इस संबंध में आगे की प्रक्रिया आरंभ होगी।
- मीना जांगड़ा, डॉयरेक्टर बाल क्रांति।