भिवानी। भिवानी में चार दिवसीय छठ महापर्व की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। शनिवार को ‘नहाय खाय’ के साथ महापर्व की शुरुआत होगी। पूर्वांचल समाज के परिवारों में सफाई और पूजा की तैयारियां जोरों पर हैं। सरोवर में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करेंगे। उसके बाद घरों में व्रतियों के लिए भोजन बनेगा। भोजन में अरवा चावल, चने की दाल एवं कद्दू की सब्जी बनाई जाएगी। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन करेंगे। अनुष्ठान के दूसरे दिन रविवार को खरना करेंगे।
भिवानी के तोशाम रोड स्थित जूई नहर घाट को छठ मईया पूजा के लिए आकर्षक ढंग से सजाया गया है। करीब तीन हजार प्रवासी परिवारों के सदस्य डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जुटेंगे। वहीं, प्रशासन ने घाट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। नहर में पानी का बहाव बढ़ाया गया है, ताकि श्रद्धालु महिलाएं परंपरानुसार जल में खड़ी होकर सूर्य को अर्घ्य दे सकें।
बांकेबिहारी और किशोरीलाल ने बताया कि 25 अक्तूबर को ‘नहाय खाय’ से पर्व की शुरुआत होगी, 26 अक्तूबर को ‘खरना’ का आयोजन होगा। इसके बाद 27 अक्तूबर की शाम को श्रद्धालु जूई नहर घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे, जबकि 28 अक्तूबर की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन किया जाएगा।
घाट पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कई मंढियां (पूजा स्थल) बनाई गई हैं, जहां महिलाएं पूरे परिवार सहित विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा करेंगी। इस अवसर पर पूर्वांचल परिवार संघ की ओर से मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिलाएं और बच्चे खरीदारी का आनंद ले सकेंगे। मेले के लिए स्टॉलों की जगह निर्धारित कर दी गई है और घाट पर प्रवेश द्वार (गेट) भी बनाया गया है।
दिवाली के बाद से ही छठ पर्व के गीत सुनाई दे रहे
भिवानी में रहने वाले पूर्वांचल समाज के परिवारों के आंगन में दिवाली के बाद से ही छठ पर्व के गीत महिमा बा रउर अपार हे छठी मईया, उ जे कांचही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए, छठी मइया आई ना दुअरिया, कोपी-कोपी बोले ले सूरज देव की स्वर लहरियां सुनाई दे रही हैं।