बहल। कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में सुविधाओं की कमी मरीजों पर भारी पड़ रही है। सरकारी चिकित्सा सुविधा के लिए करीब 50 गांवों के लोग पीएचसी पर सीधे तौर पर निर्भर हैं लेकिन यहां पर प्रतिरक्षण सेवाओं के अलावा अन्य सुविधाएं नाम मात्र ही मिल रहीं हैं। पीएचसी में मरीजों की जांच सुविधा नहीं है। दवाइयों की उपलब्धता भी कम है। लिहाजा, मरीजों को चिकित्सा सुविधा के लिए शहर के सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों में महंगा इलाज करवाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने इस पीएचसी को सीएचसी में उच्चीकृत कर चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने की मांग कई बार की है लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बहल में सीएचसी बनाने के लिए फिजिबिलिटी रिपोर्ट दे चुके हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की मांग को सही ठहराया है। पंचायत ने सीएचसी के लिए छह एकड़ भूमि देने का प्रस्ताव भी दिया है। इसके बावजूद सीएचसी की मंजूरी नहीं मिल सकी है।
मौजूदा पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी हैं। पीएचसी में मरीजों के लिए जांच सुविधा, महिला चिकित्सा, दंत चिकित्सा जैसी कोई सुविधा नहीं है। यहां पर विभिन्न संवर्ग के कर्मचारियों के पांच पद खाली हैं। लोगों ने इन्हें भरने की मांग की है।
वर्ष 1966 में बना था पीएचसी
वर्तमान पीएचसी 18 मार्च 1966 को बनाया गया था। तब कस्बे के समाजसेवी साबू परिवार के शंकरमल साबू चैरिटी ट्रस्ट ने इसे बनाकर सरकार को सौंपा था। तक इसका शुभारंभ पिलानी राजस्थान के उद्योगपति लक्ष्मी निवास बिड़ला ने किया था। तब से इसे उच्चीकृत करने या इसमें सुविधाएं बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास नहीं किया गया।
प्रसव और प्रतिरक्षण सेवाओं का ही मिल रहा लाभ
पीएचसी में चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के पद पूरी होने के कारण लोगों को केवल प्रतिरक्षण सेवाओं और प्रसूति सेवाओं का ही लाभ मिल रहा है। प्रतिरक्षण के लिए पीएचसी भवन में ही एक कमरे में उपकेंद्र संचालित किया जा रहा है। हालांकि, अभी पीएचसी के सामने उपकेंद्र का नया भवन निर्माणाधीन है। फिलहाल, बहल पीएचसी के कार्यक्षेत्र में बहल, पातवान, सुरपुरा कलां और गोकलपुरा उपकेंद्र से जुड़े गांव शामिल हैं। लोगों की मांग है कि बहल, ओबरा और नकीपुर पीएचसी को शामिल कर बहल को सीएचसी का दर्जा जल्द दिया जाना चाहिए।
स्वीकृत 15 पदों में से खाली हैं 5 पद
पीएचसी में एनएचएम स्टाफ के अलावा कर्मचारियों के 15 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल 10 पदों पर ही कर्मचारियों की नियुक्ति हुई है। इनमें से पांच पद खाली हैं। इनमें एक चिकित्सा अधिकारी, एक डेंटल ऑफिसर, एक फार्मासिस्ट, एक तकनीकी अधिकारी और एक डेंटल मेकेनिक शामिल हैं। इन पदों पर लंबे समय से कोई नियुक्ति नहीं की गई है। लोगों ने कई बार पीएचसी में महिला चिकित्सक की नियुक्ति की मांग की है लेकिन तैनाती नहीं हो पाई है।
कस्बे के आसपास के 50 गांवों के लोग सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बहल के अस्पताल पर ही निर्भर हैं। चिकित्सा सुविधा के लिए भी इन गांवों के लोग बहल ही आते हैं। इसके बावजूद इस सरकारी अस्पताल में चिकित्सा सुविधा नाकाफी है। अस्पताल में चिकित्सकों समेत औषधिकारक के पद भी भरे जाने चाहिए। - सुरेश कुमार, गोकलपुरा।
बहल कस्बे की पीएचसी को सीएचसी बनाने की मांग करीब दस साल से ज्यादा समय से विचाराधीन है। बहल की आबादी बढ़ने पर यहां सीएचसी बनाने की जरूरत है। सीएचसी बनने से यहां महिला, दंत, बाल रोग चिकित्सकों की सुविधाएं मिल सकेगी। रोगों की पहचान के लिए लैब की सुविधा मिल सकेगी। - भूपेंद्र सिंह, स्थानीय निवासी।
बहल में सीएचसी बनाने के लिए उच्चाधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। पंचायत ने सीएचसी के लिए छह एकड़ जमीन का प्रस्ताव दिया है, वह भी विभाग को भेजा गया है। विभागीय मुख्यालय को फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। - डॉ. गौरव, चिकित्साधिकारी, सीएचसी, लोहारू।