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Bhiwani News: 34 माह से पर्यावरण एनओसी में अटका सीईटीपी, औद्योगिक सेक्टर में सीवर की बदबू हवा में घोल रही जहर

Sun, 23 Nov 2025 01:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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शहर के रोहतक रोड पर ​स्थित सीईटीपी।
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भिवानी। औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में करीब 350 औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी शोधन के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पिछले 34 माह से पर्यावरण एनओसी न मिलने के कारण बंद पड़ा है। प्लांट पूरी तरह तैयार है लेकिन महंगी मशीनरी धूल फांक रही है और दोनों सेक्टरों में पानी निकासी पूरी तरह ठप है।
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जिला उद्योग संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि एचएसवीपी अधिकारियों की लापरवाही के कारण न सिर्फ उद्योग संचालक परेशान हैं बल्कि सरकारी धन का प्रयोग भी बेकार साबित हो रहा है। सीवर के ठप रहने से सेक्टरों में दूषित पानी सड़कों पर बह रहा है और बदबू से आबोहवा में लगातार प्रदूषण का जहर घुल रहा है। वहीं एचएसवीपी के कार्यकारी अभियंता का कहना है कि यह मामला पहले सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब फैसला आ चुका है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से नया परिपत्र जारी होते ही प्लांट संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
भिवानी के रोहतक रोड स्थित सेक्टर 21 और 26 में सीवर और बरसाती पानी की निकासी के लिए जनवरी 2023 में सीईटीपी तैयार किया गया था। लेकिन हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी न मिलने के कारण प्लांट को चालू नहीं किया जा सका। करीब तीन साल से सीईटीपी की नई मशीनरी बंद पड़ी है जबकि सेक्टरों का दूषित पानी सड़कों पर फैलकर वातावरण को दूषित कर रहा है। पालुवास मोड़ स्थित सीईटीपी से ढाणा रोड तक करीब दो किलोमीटर पाइपलाइन भी बिछा दी गई है लेकिन प्लांट के न चालू होने से इस लाइन का उपयोग ही नहीं हो पा रहा।
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सफाई के बाद भी फिर गंदगी से भरे बरसाती नाले
औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के बरसाती नालों की सफाई मानसून से पहले कराई गई थी लेकिन सीईटीपी से निकासी शुरू न होने के कारण नाले दोबारा गंदगी से भर गए हैं।
कई स्थानों पर नाले फिर से मिट्टी में दब गए हैं और सफाई के दौरान जेसीबी से उभारे गए हिस्से भी दोबारा जाम हो चुके हैं। आसपास के ठप पड़े सीवर मैनहोल का दूषित पानी भी इन्हीं नालों और ग्रीन बेल्ट में बह रहा है जिससे दुर्गंध बढ़ गई है। सेक्टर में मौजूद प्लास्टिक दाना उद्योग में वाशिंग का अधिक पानी इस्तेमाल होता है जो अब सीधे सड़कों पर फैल रहा है।
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औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए बनाया गया कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट सफेद हाथी साबित हो रहा है। पिछले 34 माह से इसे चालू नहीं किया जा सका है। नई मशीनरी भी अब बिना इस्तेमाल के जाम होने लगी है। पहले इसे कई महीनों तक बिजली कनेक्शन के लिए चालू नहीं किया जा सका था लेकिन अब पर्यावरण एनओसी की शर्त ने इसके संचालन पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। यह प्लांट कब चालू हो पाएगा अधिकारी भी कोई पुख्ता जानकारी नहीं दे पा रहे। जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया था वह अभी तक अधूरा है। उद्योग मालिक दूषित पानी की निकासी न होने के कारण परेशानी झेल रहे हैं। – रमन कुमार, उद्योग मालिक, औद्योगिक सेक्टर भिवानी


औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को लेकर अधिकारियों से कई बार अनुरोध किया जा चुका है। सीएम विंडो और प्रशासन के समक्ष भी शिकायतें दी गईं लेकिन न तो कोई जवाब मिला और न ही प्लांट को चालू कराया गया। दोनों सेक्टरों में सीवर ठप रहने से हालात खराब होते जा रहे हैं। उद्योगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है जबकि सरकार का करोड़ों का बजट खर्च होने के बावजूद प्लांट बंद पड़ा है। यह एचएसवीपी अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है। समय रहते सही कदम उठाए जाते तो इसका लाभ उद्योगों को बहुत पहले मिल चुका होता। – शैलेंद्र जैन, अध्यक्ष, जिला भिवानी उद्योग संघ


भिवानी के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट संचालन में पर्यावरण एनओसी अनिवार्य है। पहले ये मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहने के कारण देरी हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से नया परिपत्र जारी किया जाना है। परिपत्र जारी होते ही भिवानी सीईटीपी संचालन को लेकर तत्परता से कदम उठाए जाएंगे। – भूपेंद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एचएसवीपी भिवानी
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