भिवानी। मनीषा मौत मामले की गुत्थी 52 दिन बाद भी उलझी हुई है। हत्या की एफआईआर दर्ज हुए इतना समय बीत जाने के बावजूद सीबीआई को अब तक कोई नया सबूत नहीं मिला है। हालांकि दिल्ली एम्स की तीसरे पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मनीषा की हत्या की आशंका और गहरी हो गई है। सीबीआई टीम अब तक सात बार घटनास्थल का मुआयना कर चुकी है और कई नए लोगों से पूछताछ भी कर चुकी है।
मनीषा के पिता संजय का कहना है कि भले ही जांच में देरी हो रही है लेकिन उन्हें भरोसा है कि बेटी की मौत में देर से ही सही, न्याय जरूर मिलेगा। बता दें कि 11 अगस्त को लापता हुई ढाणी लक्ष्मण निवासी मनीषा का शव 13 अगस्त को गांव सिंघानी के नहर किनारे पेड़ के नीचे मिला था। यह मामला इतना पेचीदा है कि जांच अधिकारी हर सवाल का जवाब ढूंढते हुए किसी नए सवाल में उलझ जाते हैं।
तीन सितंबर से सीबीआई के सुपुर्द है मनीषा मौत मामला, डेढ़ माह से जारी जांच
मनीषा के परिवार की शिकायत पर तीन सितंबर को यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था। 25 सितंबर को टीम दिल्ली लौट गई थी। दिल्ली एम्स की तीसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल रिपोर्ट मिलने के बाद छह अक्तूबर को टीम दोबारा भिवानी पहुंची। सीबीआई ने दिल्ली से लौटने के बाद 13 दिनों तक लगातार पूछताछ और छानबीन की। 18 अक्तूबर को दो अधिकारी छुट्टी लेकर दिल्ली लौट गए। दिवाली के बाद टीम फिर भिवानी आकर जांच में जुट गई। डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है।
नर्सिंग कॉलेज और कीटनाशक विक्रेता पर परिजनों का शक गहराया
मनीषा के पिता संजय का कहना है कि उनकी बेटी के साथ नर्सिंग कॉलेज में कुछ गलत हुआ है। 11 अगस्त की दोपहर प्ले स्कूल की छुट्टी के बाद मनीषा आगे की पढ़ाई के लिए दाखिले की जानकारी लेने नर्सिंग कॉलेज गई थी। इसके बाद से ही उसका कुछ पता नहीं चला। 13 अगस्त को उसकी लाश नहर किनारे मिली थी। संजय का आरोप है कि कीटनाशक विक्रेता ने झूठा दावा किया कि मनीषा ने उससे कीटनाशक खरीदा था जबकि उसके रजिस्टर में मनीषा के हस्ताक्षर नहीं हैं। उनका कहना है कि विक्रेता ने यह झूठा रिकॉर्ड कॉलेज या किसी अन्य व्यक्ति के इशारे पर तैयार किया। जांच अधिकारियों को भी उसके बयानों में विरोधाभास मिला है। वहीं मनीषा का परिवार शुरू से ही नर्सिंग कॉलेज की भूमिका पर शक जताता आ रहा है।
पर्स से मिली मोबाइल की बैटरी और कवर, नहर से बरामद हुआ फोन
13 अगस्त की सुबह लोहारू पुलिस को मनीषा के शव के पास पेड़ के नीचे उसका पर्स मिला था जिसमें मोबाइल की बैटरी और कवर थे लेकिन मोबाइल गायब था। नहर का पानी बंद करवाकर रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान फोन बाद में बरामद किया गया। स्थानीय पुलिस मोबाइल से डेटा रिकवर नहीं करा पाई थी। केस सीबीआई के हाथ आने के बाद टूटे हुए मोबाइल से डेटा रिकवर कराया गया। मनीषा की कॉल डिटेल और लोकेशन के आधार पर कई संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आ पाया है।