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बिजनेस पर नोटबंदी की मार

Thu, 17 Nov 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी ने बिजनेस को ठप कर दिया है। बाजार में कैश के सर्कुलेशन पर ब्रेक लगने की वजह से मांग घटकर न्यूनतम स्तर पर है। नतीजतन, होल सेलर्स से लेकर रिटेलर्स सब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। रोजमर्रा की घरेलू जरूरत की वस्तुओं की बिक्री गिरकर आधे से भी कम रह गई है। यह हाल तब है, जब शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। सब्जीमंडी में सन्नाटा पसरा है। खरीददार न होने के कारण स्टॉक खराब होने की आशंका से आढ़ती चिंतित हैं।
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रिफाइंड, घी, चीनी, दाल, मैदा-सूजी, नमक जैसी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की मांग व आपूर्ति की पड़ताल की तो मार्केट बेदम नजर आई। नोट बंदी के अगले दिन नौ नवंबर से घी-रिफाइंड, दाल व चीनी का बिजनेस 50 से लेकर 60 प्रतिशत तक घट गया। कमोबेश यही रिटेलर्स का है। होल सेलर्स व रिटेलर्स का कहना है कि पांच सौ-हजार का नोट हम ले नहीं रहे हैं और 100-100 के नोट लोगों के पास हैं नहीं, बिजनेस की ऐसी-तैसी तो होनी ही है। जब तक कैश का सरकुलेशन मार्केट में नहीं होगा, तब तक हालात सुधरने मुश्किल हैं।

चीनी की खपत रह गई एक चौथाई
चीनी व घी के होल सेल व्यापारी बंसल ट्रेडिंग कंपनी के संचालक रंजन बंसल ने बताया कि नोटबंदी से पहले हर रोज सौ कुंतल तक चीनी की मांग थी, अब तीन दिन में भी सौ कुंतल चीनी नहीं निकल रही है। यही हाल घी का है। पहले दो दिन में 300 टीन की मांग थी अब पांच-छह दिन में भी 300 टीन नहीं लगते। शादी के सीजन में मार्केट का यह हाल है।
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रिफाइंड, बेसन, मैदा-सूजी के खरीदार नहीं
बेसन, मैदा, सूजी के होल सेलर मोडा शॉप के संचालक प्रकाश मोड़ा का कहना है कि 60 प्रतिशत डिमांड घट गई है। केवल शादी-ब्याह की वजह से आर्डर आ रहे हैं। श्याम ट्रेडिंग कंपनी के गौरव ने बताया कि 50 प्रतिशत काम ठप हो गया। नोट के चक्कर में उगाही भी बंद है। लेखराज रमेश कुमार फर्म के संचालक रमेश कुमार ने बताया कि नोट बंदी से पहले हर रोज चार टन रिफाइंड की मांग थी। यह केवल एक टन पर पहुंच गई, लेकिन आज यह दो टन पर पहुंची है। उम्मीद है कि समय के साथ चीजें ठीक हो जाएंगी।

सब्जीमंडी : स्टॉक खराब होने की चिंता
सब्जी मंडी में ग्राहकों की संख्या बहुत कम रह गई। आलू-प्याज के आढ़ती राजू ने बताया कि 40 प्रतिशत तक मांग कम हो गई। रेट भी गिर गए। पहले पांच किलो आलू का भाव 90 से 100 रुपये था, अब 65-70 रह गया। अब तो चिंता इस बात की है कि स्टॉक में रखा माल कहीं खराब न हो जाए।



इनसेट
खाद-बीज के पैसे नहीं, कैसे होगी खेती
केस 1:
तीन दिन से रुपयों के लिए लाइन में लग रहे काकड़ौली हट्ठी निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि उसे छह एकड़ में गेहूं की बुआई करनी है। नोटबंदी की घोषणा के साथ जब उसे पता चला कि पेट्रोल पंपों पर पुराने नोट सिर्फ अगले 72 घंटों तक ही मान्य होंगे। उसके पास जो रुपये थे बैंक में जमा करवा दिए हैं। अब ट्रैक्टर में तेल डलवाने के लिए भी रुपये नहीं बचे हैं। सुरेश का कहना है कि यदि आज 4000 रुपये मिल भी जाते हैं तो इन रुपयों से सिर्फ तेल ही आएगा खाद-बीज तो राम भरोसे है।


बीज ने के अभाव में नहीं हुई बुआई
केस-2
गेहूं बिजाई करने वाले गांव भांडवा के किसान राजेंद्र ने कहा कि उसने खाद तो नोट बंदी से पहले खरीद ली थी लेकिन बुआई के लिए खेत तैयार करने के बावजूद भी बीज के अभाव में बुआई नहीं हो पाई है। राजेंद्र ने बताया कि उसने बीज के रुपयों की जरूरत को देखते हुए कपास व्यापारी को अपनी कपास बेची है। लेकिन कपास व्यापारी ने पुराने नोट थमा दिए जो बीज खरीदने में कहीं भी काम नहीं आ रहे हैं।

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चार एकड़ जमीन, मिले केवल 4500 रुपये
केस-3
गेहूं बुआई के लिए खेत तैयार कर चुके भांडवा निवासी किसान उमेद सिंह ने बताया कि दो दिन से लाइन में लगने के बाद 4500 रुपये मिले है। चार एकड़ में गेहूं की बिजाई करनी है। लेकिन 4500 रुपये तो एक एकड़ पर ही खर्च हो जाएंगे। खाद-बीज के अभाव में गेहूं बुआई का समय निकला जा रहा है यदि समय पर बुआई का कार्य नहीं किया गया तो फिर गेहूं उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
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